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बिज़नेस
सरकार ने बैंकों से माइक्रो उद्यमों के लिए डिजिटल ऋण बढ़ाने का आग्रह किया
✍️ Business Standard
🗓 07 अक्टू. 2026, 02:17 PM
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सरकार ने बैंकों से माइक्रो फर्मों को डिजिटल ऋण प्रदान करने की मात्रा बढ़ाने का अनुरोध किया है, ताकि तकनीक‑आधारित समाधान से क्रेडिट पहुंच में सुधार हो सके।
नई दिल्ली – केंद्र सरकार ने हाल ही में बैंकों को निर्देश दिया है कि वे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से माइक्रो‑उद्यमों को ऋण प्रदान करने की गति बढ़ाएँ। यह कदम ऑनलाइन प्रक्रियाओं और फ़िनटेक साझेदारियों का उपयोग करके छोटे व्यवसायों तक आसान पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जो अक्सर औपचारिक दस्तावेज़ों की कमी के कारण वित्तीय संस्थानों से दूर रहते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल चैनल ऋण प्रक्रिया को तेज़ और लागत‑प्रभावी बना सकते हैं, जिससे माइक्रो फर्मों को सस्ता क्रेडिट मिल सके। बैंकों से उम्मीद की जा रही है कि वे वित्तीय समावेशन के इस सरकारी लक्ष्य के साथ अपने ऋण नीतियों को संरेखित करें और डिजिटल ऋण की मात्रा पर नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
यह पहल छोटे उद्यमों के लिए एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो रोजगार और जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। तकनीकी‑सक्षम क्रेडिट समाधान को बढ़ावा देकर सरकार वित्तीय अंतर को पाटने का लक्ष्य रखती है, जो अब तक माइक्रो‑बिज़नेस की वृद्धि में बाधा बनकर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्यक्रम की सफलता के लिए मजबूत डिजिटल बुनियादी ढाँचा, डेटा सुरक्षा और बिना पारंपरिक जमानत के भी क्रेडिट योग्यता का सही आकलन आवश्यक होगा। यह निर्देश भारत की जमीनी अर्थव्यवस्था के लिए क्रेडिट डिलीवरी को आधुनिक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल चैनल ऋण प्रक्रिया को तेज़ और लागत‑प्रभावी बना सकते हैं, जिससे माइक्रो फर्मों को सस्ता क्रेडिट मिल सके। बैंकों से उम्मीद की जा रही है कि वे वित्तीय समावेशन के इस सरकारी लक्ष्य के साथ अपने ऋण नीतियों को संरेखित करें और डिजिटल ऋण की मात्रा पर नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
यह पहल छोटे उद्यमों के लिए एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो रोजगार और जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। तकनीकी‑सक्षम क्रेडिट समाधान को बढ़ावा देकर सरकार वित्तीय अंतर को पाटने का लक्ष्य रखती है, जो अब तक माइक्रो‑बिज़नेस की वृद्धि में बाधा बनकर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्यक्रम की सफलता के लिए मजबूत डिजिटल बुनियादी ढाँचा, डेटा सुरक्षा और बिना पारंपरिक जमानत के भी क्रेडिट योग्यता का सही आकलन आवश्यक होगा। यह निर्देश भारत की जमीनी अर्थव्यवस्था के लिए क्रेडिट डिलीवरी को आधुनिक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।