📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pulakit Singh
अपराध
सरकार ने आतंकवादी मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए 3 नई NIA अदालतें स्थापित कीं
✍️ Business Standard
🗓 28 अग. 2026, 11:36 PM
👁 51
केन्द्र सरकार ने देश भर में लंबित आतंकवादी मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए तीन नई NIA अदालतों की स्थापना की घोषणा की है।
नई दिल्ली, 28 अगस्त (बिजनेस स्टैंडर्ड) – गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की तीन नई अदालतों की स्थापना को मंजूरी दी है। यह कदम आतंकवाद से जुड़े मामलों की लंबी सुनवाई को घटाकर न्याय प्रक्रिया को तेज करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इन नई अदालतों को आने वाले कुछ हफ्तों में कार्यशील बनाया जाएगा और इन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा संचालित किया जाएगा। इनका अधिकार क्षेत्र उन मामलों पर होगा जो कई महीनों से लंबित हैं, जिसमें उच्च प्रोफ़ाइल आतंकवादी साजिशें और सीमा‑पार वित्त पोषण शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा न्यायिक क्षमता की विस्तृत समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है, जिसका उद्देश्य जांच की गति को सुनवाई की गति से मिलाना है। अधिकारियों का अनुमान है कि अतिरिक्त अदालतें कई महीनों तक की सुनवाई अवधि को घटा देंगी, जिससे राष्ट्रीय आतंकविरोधी ढांचा मजबूत होगा।
कानूनी विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत किया, यह कहते हुए कि तेज़ न्याय भविष्य में उग्रवादी गतिविधियों को हतोत्साहित कर सकता है और आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा बढ़ा सकता है। ये अदालतें NIA के स्थापित प्रक्रिया नियमों के तहत कार्य करेंगी और प्रमुख न्यायिक केंद्रों में स्थित होंगी, हालांकि सटीक स्थान अभी घोषित नहीं किए गए हैं।
सरकार ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अनुरोध किया है कि वे नई बेंचों के साथ निकट सहयोग करें, ताकि मामलों का सुगम स्थानांतरण हो और प्रक्रियात्मक देरी से बचा जा सके।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इन नई अदालतों को आने वाले कुछ हफ्तों में कार्यशील बनाया जाएगा और इन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा संचालित किया जाएगा। इनका अधिकार क्षेत्र उन मामलों पर होगा जो कई महीनों से लंबित हैं, जिसमें उच्च प्रोफ़ाइल आतंकवादी साजिशें और सीमा‑पार वित्त पोषण शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा न्यायिक क्षमता की विस्तृत समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है, जिसका उद्देश्य जांच की गति को सुनवाई की गति से मिलाना है। अधिकारियों का अनुमान है कि अतिरिक्त अदालतें कई महीनों तक की सुनवाई अवधि को घटा देंगी, जिससे राष्ट्रीय आतंकविरोधी ढांचा मजबूत होगा।
कानूनी विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत किया, यह कहते हुए कि तेज़ न्याय भविष्य में उग्रवादी गतिविधियों को हतोत्साहित कर सकता है और आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता का भरोसा बढ़ा सकता है। ये अदालतें NIA के स्थापित प्रक्रिया नियमों के तहत कार्य करेंगी और प्रमुख न्यायिक केंद्रों में स्थित होंगी, हालांकि सटीक स्थान अभी घोषित नहीं किए गए हैं।
सरकार ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अनुरोध किया है कि वे नई बेंचों के साथ निकट सहयोग करें, ताकि मामलों का सुगम स्थानांतरण हो और प्रक्रियात्मक देरी से बचा जा सके।