📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / National Museum of Korea
बिज़नेस
सोने की कीमतें बढ़ी, फिर भी ज्वेलरी की मांग में स्थिरता, जौहरीयों का कहना
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🗓 06 अक्टू. 2026, 05:16 AM
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सोने की कीमतों में रिकॉर्ड स्तर के बावजूद, भारतीय जौहरीयों ने बताया कि ज्वेलरी की कुल मांग में गिरावट नहीं आई, उपभोक्ता रुचि में स्थिरता और खरीदारी के बदलते रुझानों को देखते हुए।
भारत में सोने की कीमतें कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई हैं, जिससे ज्वेलरी सेक्टर में गिरावट का डर बना हुआ था। लेकिन प्रमुख बाजारों में काम करने वाले जौहरीयों के एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि सोने की ज्वेलरी की मांग अभी भी स्थिर है, कई ग्राहक लागत को नियंत्रित करने के लिए छोटे आकार या वैकल्पिक डिज़ाइन चुन रहे हैं।
उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि खरीदारी के तरीके में बदलाव आया है: जबकि कुछ महंगे ख़रीद को टाला जा रहा है, शादी की अंगूठियां, पारंपरिक गहने और निवेश‑ग्रेड सोना जैसी रोज़मर्रा की खरीदारी में स्थिरता बनी हुई है। रिटेलर यह भी नोट कर रहे हैं कि सोने‑मिश्र धातु और मिश्र धातु वाले गहनों की मांग में वृद्धि हुई है, जो कम कीमत पर सोने का आकर्षण बनाए रखता है।
विश्लेषकों का मानना है कि सांस्कृतिक कारण और सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देखना, विशेषकर त्यौहारों के मौसम से पहले, मांग को समर्थन दे रहा है। फिर भी, जौहरी चेतावनी दे रहे हैं कि कीमतों में लगातार उतार‑चढ़ाव मार्जिन पर दबाव डाल सकता है और उपभोक्ताओं को वैकल्पिक निवेश विकल्पों की ओर धकेल सकता है।
समग्र रूप से, ज्वेलरी बाजार कीमतों के नए परिदृश्य के अनुसार खुद को ढाल रहा है, रिटेलर इन्वेंट्री और प्रोमोशन रणनीतियों को बदलकर इस स्थिति से निपट रहे हैं।
उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि खरीदारी के तरीके में बदलाव आया है: जबकि कुछ महंगे ख़रीद को टाला जा रहा है, शादी की अंगूठियां, पारंपरिक गहने और निवेश‑ग्रेड सोना जैसी रोज़मर्रा की खरीदारी में स्थिरता बनी हुई है। रिटेलर यह भी नोट कर रहे हैं कि सोने‑मिश्र धातु और मिश्र धातु वाले गहनों की मांग में वृद्धि हुई है, जो कम कीमत पर सोने का आकर्षण बनाए रखता है।
विश्लेषकों का मानना है कि सांस्कृतिक कारण और सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देखना, विशेषकर त्यौहारों के मौसम से पहले, मांग को समर्थन दे रहा है। फिर भी, जौहरी चेतावनी दे रहे हैं कि कीमतों में लगातार उतार‑चढ़ाव मार्जिन पर दबाव डाल सकता है और उपभोक्ताओं को वैकल्पिक निवेश विकल्पों की ओर धकेल सकता है।
समग्र रूप से, ज्वेलरी बाजार कीमतों के नए परिदृश्य के अनुसार खुद को ढाल रहा है, रिटेलर इन्वेंट्री और प्रोमोशन रणनीतियों को बदलकर इस स्थिति से निपट रहे हैं।