📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / kallerna
कृषि
जीआई‑टैग्ड नेचुरल फार्मिंग से उत्तर‑पूर्व भारत बन सकता है वैश्विक निर्यात केंद्र
✍️ TRIPURA STAR NEWS
🗓 27 अग. 2026, 11:17 AM
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विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर‑पूर्व में नेचुरल फार्मिंग को जीआई टैग मिलने से क्षेत्र के जैविक उत्पादों की निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी।
उत्तर‑पूर्व भारत में प्राकृतिक खेती के तरीकों को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिलने की संभावना पर चर्चा चल रही है। इस कदम से क्षेत्र के जैविक उत्पादों की विशिष्टता को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कानूनी रूप से मान्यता मिल सकेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीआई‑टैग से किसान प्रीमियम कीमतें प्राप्त कर सकेंगे, निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे और पर्यावरण‑सचेत खरीदारों को भरोसेमंद उत्पाद मिलेंगे। यह टैग पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा भी करेगा और क्षेत्र की प्रतिष्ठा के दुरुपयोग को रोकेगा।
राज्य सरकारें और कृषि मंत्रालय मिलकर प्रमाणन प्रक्रिया के लिए दिशा‑निर्देश तैयार कर रहे हैं, जबकि किसान सहकारी समितियां अपनी खेती की पद्धतियों का दस्तावेजीकरण कर रही हैं। सफल कार्यान्वयन से छोटे किसानों की आय में विविधता आएगी और उत्तर‑पूर्व को जैविक निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकेगा।
भूखंडों का टुकड़ापन, ठंडा‑संचालन सुविधा की कमी और किसानों के कौशल विकास की आवश्यकता जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, पर अधिकारियों को आशा है कि जीआई ढांचा बड़े पैमाने पर बाजार एकीकरण को तेज करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीआई‑टैग से किसान प्रीमियम कीमतें प्राप्त कर सकेंगे, निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे और पर्यावरण‑सचेत खरीदारों को भरोसेमंद उत्पाद मिलेंगे। यह टैग पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा भी करेगा और क्षेत्र की प्रतिष्ठा के दुरुपयोग को रोकेगा।
राज्य सरकारें और कृषि मंत्रालय मिलकर प्रमाणन प्रक्रिया के लिए दिशा‑निर्देश तैयार कर रहे हैं, जबकि किसान सहकारी समितियां अपनी खेती की पद्धतियों का दस्तावेजीकरण कर रही हैं। सफल कार्यान्वयन से छोटे किसानों की आय में विविधता आएगी और उत्तर‑पूर्व को जैविक निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकेगा।
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