📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / This Photo was taken by Timothy A. Gonsalves. Fee
अपराध
गुजरात में ‘घोस्ट डिमोलिशन’ डर, अहमदाबाद की दुकानों को ध्वस्त, सूरत में हाई कोर्ट में मामला
✍️ The New Indian Express
🗓 26 अग. 2026, 10:03 AM
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‘घोस्ट डिमोलिशन’ चेतावनी के चलते अहमदाबाद में कई दुकानें ध्वस्त हुईं, जबकि संबंधित मामला सूरत हाई कोर्ट में चल रहा है।
गुजरात में ‘घोस्ट डिमोलिशन’ चेतावनियों की लहर ने व्यावसायिक संपत्तियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है, जिसमें अहमदाबाद में कई दुकानों को जबरन ध्वस्त किया गया। स्थानीय अधिकारियों ने इन चेतावनियों के आधार पर कार्रवाई की, यह कहते हुए कि ये इमारतें संभवतः अवैध या असुरक्षित थीं।
अहमदाबाद की घटनाओं ने व्यापारियों और निवासियों का ध्यान आकर्षित किया है, जिन्होंने बताया कि अचानक दुकानों का हटना व्यापार में बाधा बन गया और ध्वस्त करने के मानदंडों पर सवाल उठे हैं। प्रत्येक ध्वस्त करने के पीछे के विशिष्ट कारणों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे प्रभावित दुकानदार स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
इसी के साथ, सूरत में इस ध्वस्त करने के डर से संबंधित एक कानूनी चुनौती दायर की गई है। मामला अब सूरत हाई कोर्ट में पहुंच चुका है, जहाँ याचिकाकर्ता ध्वस्त आदेशों पर रोक और पुनः समीक्षा की मांग कर रहे हैं। कोर्ट का निर्णय राज्य में समान चेतावनियों के भविष्य में लागू होने वाले उपायों को प्रभावित कर सकता है।
गुजरात के विभिन्न हितधारक इस हाई कोर्ट की सुनवाई को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि इसका परिणाम ‘घोस्ट डिमोलिशन’ ढाँचे के तहत भविष्य की प्रवर्तन कार्रवाईयों के लिए मिसाल स्थापित कर सकता है।
अहमदाबाद की घटनाओं ने व्यापारियों और निवासियों का ध्यान आकर्षित किया है, जिन्होंने बताया कि अचानक दुकानों का हटना व्यापार में बाधा बन गया और ध्वस्त करने के मानदंडों पर सवाल उठे हैं। प्रत्येक ध्वस्त करने के पीछे के विशिष्ट कारणों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे प्रभावित दुकानदार स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
इसी के साथ, सूरत में इस ध्वस्त करने के डर से संबंधित एक कानूनी चुनौती दायर की गई है। मामला अब सूरत हाई कोर्ट में पहुंच चुका है, जहाँ याचिकाकर्ता ध्वस्त आदेशों पर रोक और पुनः समीक्षा की मांग कर रहे हैं। कोर्ट का निर्णय राज्य में समान चेतावनियों के भविष्य में लागू होने वाले उपायों को प्रभावित कर सकता है।
गुजरात के विभिन्न हितधारक इस हाई कोर्ट की सुनवाई को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि इसका परिणाम ‘घोस्ट डिमोलिशन’ ढाँचे के तहत भविष्य की प्रवर्तन कार्रवाईयों के लिए मिसाल स्थापित कर सकता है।