📷 चित्र स्रोत: TOI India (via NewsData)
राजनीति
जनरेशन ज़ेड की स्लैंग ने भारतीय संसद में जगह बनाई
✍️ TOI India
🗓 29 जुल. 2026, 06:40 PM
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संसद में सांसदों ने 'कुचु-पुचु', 'डेलुलू', 'क्लॉक इट' जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जो युवा भाषा के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
हालिया लोकसभा सत्र में कई सांसदों ने "कुचु-पुचु", "डेलुलू", और "क्लॉक इट" जैसे जेन ज़ेड स्लैंग का उपयोग किया। ये शब्द सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हैं और वक्तव्यों में जोर देने या हास्य जोड़ने के लिए इस्तेमाल हुए।
इस प्रयोग से सांसदों में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न हुईं। कुछ ने युवा मतदाताओं से जुड़ने के प्रयास की प्रशंसा की, जबकि अन्य ने चिंता जताई कि ऐसी भाषा सभ्यतापूर्ण चर्चा के मानदंड को कमजोर कर सकती है।
राजनीति विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रवृत्ति व्यापक सांस्कृतिक बदलाव को दर्शाती है, जहाँ राजनेता समकालीन भाषा अपनाकर सुलभ दिखने की कोशिश करते हैं। फिर भी, वे चेतावनी देते हैं कि विधायी चर्चा में स्पष्टता और सम्मान बनाए रखना अनिवार्य है।
यह घटना पहले ही समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है, जहाँ टिप्पणीकार आधुनिकता और पार्लियामेंटरी शिष्टाचार के बीच संतुलन पर बहस कर रहे हैं।
इस प्रयोग से सांसदों में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न हुईं। कुछ ने युवा मतदाताओं से जुड़ने के प्रयास की प्रशंसा की, जबकि अन्य ने चिंता जताई कि ऐसी भाषा सभ्यतापूर्ण चर्चा के मानदंड को कमजोर कर सकती है।
राजनीति विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रवृत्ति व्यापक सांस्कृतिक बदलाव को दर्शाती है, जहाँ राजनेता समकालीन भाषा अपनाकर सुलभ दिखने की कोशिश करते हैं। फिर भी, वे चेतावनी देते हैं कि विधायी चर्चा में स्पष्टता और सम्मान बनाए रखना अनिवार्य है।
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