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02 अक्टू. 2026•
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धर्म

गयाजी पितृपक्ष मेला पिंडदान करने पहुंचे विदेशी श्रद्धालु

✍️ रिपोर्टर: Awanish Kumar 🗓 02 अक्टू. 2026, 11:40 AM 👁 14
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गयाजी में आयोजित पितृपक्ष मेला में सात समुद्र पार कर अपने पूर्वजों का पिंडदान करने पहुंचे विदेशी श्रद्धालु

गयाजी से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
सात समंदर पार से गयाजी पहुंचे विदेशी पिंडदानी, भारतीय परिधान साड़ी और धोती कुर्ता में पहन कर कर रहे हैं पिंडदान.




गयाजी में चल रहे विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से भी श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर गयाजी पहुंच रहे हैं। फ्रांस, रूस और जर्मनी से आए 22 विदेशी श्रद्धालुओं के जत्थे ने देवघाट पर पूरे विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण किया।


ये तस्वीरें गयाजी के देवघाट की हैं।
जहां देश की सीमाएं और भाषाओं का फर्क मिट गया।
और एक ही आस्था में शामिल हो गए सात समंदर पार से आए श्रद्धालु।
फ्रांस, रूस और जर्मनी से पहुंचे 22 सदस्यीय विदेशी श्रद्धालुओं के जत्थे ने फल्गु नदी के तट पर अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद किया और विधि-विधान के साथ पिंडदान और तर्पण किया।



वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विदेशी श्रद्धालु भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आए।
पिंड अर्पित कर उन्होंने अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना की।
देवघाट पर मौजूद यह नजारा गयाजी की उस धार्मिक महत्ता को भी दिखाता है, जहां पितृपक्ष के दौरान देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने पहुंचते हैं।



किसी के लिए गयाजी एक धार्मिक तीर्थ है।
तो किसी के लिए अपने पूर्वजों से जुड़ने का माध्यम।
सात समंदर पार से आए इन विदेशी श्रद्धालुओं ने भी गया की धरती पर भारतीय परंपरा के अनुसार पिंडदान कर यही संदेश दिया कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती।
देवघाट पर पिंडदान और तर्पण के दौरान श्रद्धा, विश्वास और भारतीय संस्कृति का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने पितृपक्ष मेले की तस्वीर को और खास बना दिया।
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