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14 Oct 2026•
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Agriculture

ग्वालियर जिले में पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई, जागरूकता अभियान और हार्वेस्टर में उपकरण अनिवार्य

✍️ Reporter: Pranav Gaur 🗓 14 Oct 2026, 09:37 PM 👁 12
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ग्वालियर जिले में खेतों में पराली और नरवाई जलाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और हार्वेस्टर में नरवाई प्रबंधन उपकरण लगाना अनिवार्य होगा।

ग्वालियर जिले में खेतों में पराली और नरवाई जलाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है। इसके तहत गांव-गांव विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान और कानूनी दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस संबंध में प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक बैठक में कलेक्टर श्रीमती चौहान ने कहा कि राज्य शासन पराली एवं नरवाई प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने अधिकारियों को इस कार्य को गंभीरता से लेने और किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय उनके उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि पराली जलाना प्रतिबंधित है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर श्रीमती चौहान ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के अधिकारियों को गौशालाओं से जुड़े किसानों को अनुदान के आधार पर पराली एवं नरवाई प्रबंधन के उपकरण उपलब्ध कराने के लिए प्रकरण तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को इन उपकरणों का लाभ दिलाया जाए, ताकि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त, धान एवं अन्य फसलों की कटाई करने वाले हार्वेस्टर में नरवाई प्रबंधन से संबंधित उपयुक्त उपकरण अनिवार्य रूप से लगवाए जाएं। कटाई के दौरान बिना आवश्यक उपकरण के चलने वाले हार्वेस्टर के विरुद्ध जुर्माने के साथ पुलिस कार्रवाई भी की जाएगी।

किसानों को पराली एवं नरवाई के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ रीपर, स्ट्रॉ बेलर, श्रेडर और मल्चर जैसे कृषि यंत्रों के उपयोग के प्रति जागरूक किया जाएगा। इन उपकरणों की मदद से फसल अवशेषों को खेत में फैलाकर मिट्टी में मिलाया जा सकता है, अवशेषों से गांठें बनाई जा सकती हैं अथवा खेत में ही अगली फसल की बुवाई की जा सकती है। इससे पराली जलाने की आवश्यकता नहीं रहती और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलती है। खेतों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, साथ ही मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंचता है और मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
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