स्थानीय
गाँव की शाम: नाश्ते की दुकान पर चाय और पकौड़ी की खुशबू
गाँव के नाश्ते की दुकान में शाम के समय गरमागरम पकौड़ी, जलेबी और चाय के साथ मिट्टी की खुशबू फैलती है, जहाँ चाय वाली अम्मा और पत्रकार के बीच एक सरल संवाद हुआ।
गाँव में शाम ढलते ही नाश्ते की दुकान पर अलग ही रौनक लगती है। गरमा-गरम पकौड़ी, जलेबी और चाय के साथ गाँव की मिट्टी वाली खुशबू—यही तो है गाँव की शाम का असली स्वाद।
चाय वाली अम्मा ने चाय देते हुए पत्रकार जी से कहा, "मेरे दुकान का चाय नहीं पिजीएगा?" पत्रकार ने उत्तर दिया, "चाची, मैं भी आपके ही समाज का हूँ, क्यों नहीं पिउंगा।" उनकी दुकान के चाय का गजब स्वाद था।
सच में गरीब का दिल बहुत बड़ा होता है। उस दुकान में अपनेपन का अहसास होता है, जहाँ सभी एक दूसरे के साथ सहजता से मिलते हैं।
आपके गाँव में शाम होते ही नाश्ते की दुकान पर क्या मिलता है? कमेंट में जरूर बताइए।
चाय वाली अम्मा ने चाय देते हुए पत्रकार जी से कहा, "मेरे दुकान का चाय नहीं पिजीएगा?" पत्रकार ने उत्तर दिया, "चाची, मैं भी आपके ही समाज का हूँ, क्यों नहीं पिउंगा।" उनकी दुकान के चाय का गजब स्वाद था।
सच में गरीब का दिल बहुत बड़ा होता है। उस दुकान में अपनेपन का अहसास होता है, जहाँ सभी एक दूसरे के साथ सहजता से मिलते हैं।
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