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28 Sep 2026•
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गांधीनगर में चिल्ड्रन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी के छठे दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की।

गांधीनगर में चिल्ड्रन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी के छठे दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की।

✍️ Reporter: Ranjanben Dharmendrbhai Panchal 🗓 31 Jul 2026, 05:02 PM 👁 72
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गांधीनगर में चिल्ड्रन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी के छठे दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की।

देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने गुजरात के अपने मुख्यमंत्री काल के दौरान भारतीय संस्कृति और प्राचीन ऋषियों के दिव्य विजन को साकार करने के लिए इस अनूठी यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी। ऋषियों का शाश्वत विचार कि 'संस्कारयुक्त और भावनात्मक रूप से समृद्ध बालक ही राष्ट्र का सच्चा निर्माता बन सकता है', इस संस्थान का मूल आधार है।

शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ का उल्लेख करते हुए बल दिया कि बालक के जीवन में तीन प्रमुख मार्गदर्शक होते हैं, माता, पिता और शिक्षक। जिस बालक को जितेंद्रिय, परोपकारी, धर्मनिष्ठ और विद्वान माता-पिता और गुरु मिलते हैं, उसका जीवन धन्य हो जाता है।

भारतीय संस्कृति मन, वचन और कर्म की पवित्रता व एकरूपता सिखाती है। जब तक आचरण शुद्ध न हो, कोई समाज को सही दिशा नहीं दे सकता।

महर्षि दयानंद सरस्वती जी के विचारों को रेखांकित करते हुए कहा कि केवल विद्वत्ता या डिग्रियां पर्याप्त नहीं हैं, व्यक्ति का संस्कारवान और धर्मनिष्ठ होना आवश्यक है। मैकाले की शिक्षा नीति से हुए सांस्कृतिक नुकसान को दूर कर हमें 'सा विद्या या विमुक्तये' के भाव से आगे बढ़ना होगा।

बालक जन्म से कोरे कागज की भांति होता है। प्राचीन भारत में गर्भाधान से लेकर उपनयन और वेदारंभ तक के 16 संस्कारों के माध्यम से बालक को श्रेष्ठ मानव बनाने की सुदृढ़ व्यवस्था थी।

इस अवसर पर सर्वांगीण बाल विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. इंदुमति काटदरे जी तथा डॉ. ज्योतिबेन थानकी जी को डॉक्टर ऑफ लेटर्स की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। तथा 14 पुस्तकों, विश्वविद्यालय के वार्षिक प्रतिवेदन, हिंदी कैलेंडर तथा 'डिवाइन चाइल्ड' एंड्रॉयड एप्लिकेशन का विमोचन किया गया। साथ ही मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक, Ph.D. उपाधियां एवं विशिष्ट पुरस्कार प्रदान किए गए।

डिग्री प्राप्त करने वाले सभी नव-स्नातकों, शोधार्थियों और शिक्षकों को हार्दिक बधाई! यहां से प्राप्त मानवीय मूल्यों और परोपकार के मिशन को जीवनभर एक राष्ट्रीय दायित्व के रूप में आगे बढ़ाएं।
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