ग्राम पंचायत बलबहरा में ₹20 हजार के बिल पर उठे सवाल, बिना स्पष्ट मात्रा और दर के भुगतान का मामला जांच के घेरे में!
ग्राम पंचायत बलबहरा में ₹20 हजार के बिल पर उठे सवाल, बिना स्पष्ट मात्रा और दर के भुगतान का मामला जांच के घेरे में!
सरमन ट्रेडर्स के नाम से जारी बिल में ₹20,000 की राशि दर्ज, सामग्री और कार्य का विवरण स्पष्ट नहीं; पारदर्शिता पर उठे सवाल
✍️ रिपोर्टर – राजभान कुशवाहा
शहडोल/बुढ़ार। जनपद पंचायत बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत बलबहरा में विकास कार्यों से संबंधित बिलों और भुगतान की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दिखाई दे रहे एक बिल की तस्वीर में सरमन ट्रेडर्स के नाम से ₹20,000 की राशि दर्ज है। बिल में सामग्री अथवा कार्य का हस्तलिखित विवरण मौजूद है, लेकिन मात्रा और दर के कॉलम में स्पष्ट जानकारी नहीं दिखाई दे रही है।
### बिल में ₹20 हजार की राशि, लेकिन मात्रा और दर का उल्लेख क्यों नहीं?
प्राप्त बिल की तस्वीर में क्रमांक 25 तथा कुल ₹20,000 की राशि दर्ज दिखाई देती है। बिल पर ग्राम पंचायत से संबंधित हस्ताक्षर एवं मुहर भी नजर आ रही है।
ऐसे में कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आते हैं। आखिर यह राशि किस विकास कार्य के लिए खर्च की गई? बिल में दर्शाई गई सामग्री अथवा सेवा वास्तव में उपलब्ध कराई गई थी या नहीं? यदि सामग्री खरीदी गई, तो उसकी मात्रा और प्रति इकाई दर का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं किया गया?
क्या बिना सत्यापन के किया गया भुगतान?
ग्राम पंचायत के वित्तीय अभिलेखों में प्रत्येक खर्च का उचित विवरण, संबंधित कार्य का रिकॉर्ड तथा नियमानुसार सत्यापन होना आवश्यक है।
इस बिल को लेकर यह जांच का विषय है कि संबंधित राशि का वास्तविक भुगतान हुआ है या नहीं। यदि भुगतान किया गया है, तो किस अधिकारी अथवा कर्मचारी ने बिल का सत्यापन किया और किस आधार पर राशि स्वीकृत की गई?
सचिव, सरपंच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
ग्राम पंचायत बलबहरा में विकास कार्यों के नाम पर प्रस्तुत किए जा रहे बिलों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता सामने आ रही है। विशेष रूप से बिल से संबंधित सामग्री, कार्यस्थल, भुगतान अभिलेख और स्वीकृति प्रक्रिया की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
यदि जांच में फर्जी बिल, गलत मूल्यांकन या अनियमित भुगतान की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
कलेक्टर शहडोल से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
इस मामले में जिला प्रशासन और जनपद पंचायत बुढ़ार के जिम्मेदार अधिकारियों से अपेक्षा है कि संबंधित बिल की मूल प्रति, भुगतान वाउचर, कार्य की स्वीकृति तथा सामग्री की वास्तविक उपलब्धता का मिलान कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ₹20,000 की राशि किस कार्य के लिए दर्ज की गई और उसका वास्तविक लाभ ग्राम पंचायत को मिला भी या नही
जनहित में सवाल — सरकारी राशि का एक-एक रुपया कहां और कैसे खर्च हुआ, इसका जवाब जनता को मिलना चाहिए।
सरमन ट्रेडर्स के नाम से जारी बिल में ₹20,000 की राशि दर्ज, सामग्री और कार्य का विवरण स्पष्ट नहीं; पारदर्शिता पर उठे सवाल
✍️ रिपोर्टर – राजभान कुशवाहा
शहडोल/बुढ़ार। जनपद पंचायत बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत बलबहरा में विकास कार्यों से संबंधित बिलों और भुगतान की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दिखाई दे रहे एक बिल की तस्वीर में सरमन ट्रेडर्स के नाम से ₹20,000 की राशि दर्ज है। बिल में सामग्री अथवा कार्य का हस्तलिखित विवरण मौजूद है, लेकिन मात्रा और दर के कॉलम में स्पष्ट जानकारी नहीं दिखाई दे रही है।
### बिल में ₹20 हजार की राशि, लेकिन मात्रा और दर का उल्लेख क्यों नहीं?
प्राप्त बिल की तस्वीर में क्रमांक 25 तथा कुल ₹20,000 की राशि दर्ज दिखाई देती है। बिल पर ग्राम पंचायत से संबंधित हस्ताक्षर एवं मुहर भी नजर आ रही है।
ऐसे में कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आते हैं। आखिर यह राशि किस विकास कार्य के लिए खर्च की गई? बिल में दर्शाई गई सामग्री अथवा सेवा वास्तव में उपलब्ध कराई गई थी या नहीं? यदि सामग्री खरीदी गई, तो उसकी मात्रा और प्रति इकाई दर का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं किया गया?
क्या बिना सत्यापन के किया गया भुगतान?
ग्राम पंचायत के वित्तीय अभिलेखों में प्रत्येक खर्च का उचित विवरण, संबंधित कार्य का रिकॉर्ड तथा नियमानुसार सत्यापन होना आवश्यक है।
इस बिल को लेकर यह जांच का विषय है कि संबंधित राशि का वास्तविक भुगतान हुआ है या नहीं। यदि भुगतान किया गया है, तो किस अधिकारी अथवा कर्मचारी ने बिल का सत्यापन किया और किस आधार पर राशि स्वीकृत की गई?
सचिव, सरपंच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
ग्राम पंचायत बलबहरा में विकास कार्यों के नाम पर प्रस्तुत किए जा रहे बिलों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता सामने आ रही है। विशेष रूप से बिल से संबंधित सामग्री, कार्यस्थल, भुगतान अभिलेख और स्वीकृति प्रक्रिया की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
यदि जांच में फर्जी बिल, गलत मूल्यांकन या अनियमित भुगतान की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
कलेक्टर शहडोल से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
इस मामले में जिला प्रशासन और जनपद पंचायत बुढ़ार के जिम्मेदार अधिकारियों से अपेक्षा है कि संबंधित बिल की मूल प्रति, भुगतान वाउचर, कार्य की स्वीकृति तथा सामग्री की वास्तविक उपलब्धता का मिलान कर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ₹20,000 की राशि किस कार्य के लिए दर्ज की गई और उसका वास्तविक लाभ ग्राम पंचायत को मिला भी या नही
जनहित में सवाल — सरकारी राशि का एक-एक रुपया कहां और कैसे खर्च हुआ, इसका जवाब जनता को मिलना चाहिए।