धर्म
गणमुक्तेश्वर महादेव नक्का कुआं मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का यज्ञ के साथ हुआ समापन
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गणमुक्तेश्वर महादेव नक्का कुआं मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन भव्य यज्ञ के साथ संपन्न हुआ। कथावाचक पंडित विनोद शर्मा शास्त्री ने यज्ञ कराया और भागवत कथा के महत्व पर प्रकाश डाला।
गणमुक्तेश्वर महादेव नक्का कुआं मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ के आयोजन के साथ हुआ। यज्ञ आचार्य पंडित विनोद शर्मा शास्त्री ने संपूर्ण विधि-विधान से यज्ञ संपन्न कराया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ तीनों प्रकार के पापों का नाश करने वाली है और यह स्वयं भगवान कृष्ण की वाणी है। इस कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य का कल्याण हो जाता है।
पंडित विनोद शर्मा शास्त्री ने धुंधकारी जैसे राक्षस के उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से उसे मुक्ति प्राप्त हुई। उन्होंने पितृ पक्ष में श्रीमद् भागवत पुराण के पाठ के विशेष महत्व पर जोर दिया। उनके अनुसार, पितृ पक्ष में कथा का श्रवण करने से अकाल मृत्यु से ग्रस्त अतृप्त आत्माओं को मोक्ष और सद्गति प्राप्त होती है।
उन्होंने यज्ञ के महत्व को समझाते हुए कहा कि यज्ञ करने से देवता प्रसन्न होते हैं और पर्यावरण शुद्ध होता है। पर्यावरण की शुद्धता से ही महामारी जैसी बीमारियों को दूर किया जा सकता है। इसलिए प्रत्येक मानव को पर्यावरण की रक्षा के लिए यज्ञ करना चाहिए और वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि विवाह या बच्चों के जन्मदिन जैसे शुभ अवसरों पर वृक्षारोपण अवश्य किया जाना चाहिए, क्योंकि प्रकृति हमें स्वच्छ वायु प्रदान करती है।
कथा के अंत में उन्होंने कहा कि भागवत सभी का कल्याण करती है। किसी भी धर्म अनुष्ठान के पूर्ण होने के उपरांत अन्न वितरण का विशेष महत्व है। उन्होंने गरीब और असहाय लोगों को भोजन कराने से भगवान के प्रसन्न होने की बात कही। इस अवसर पर मुख्य यजमान मुकेश सैनी, धर्मपत्नी माया देवी, वरिष्ठ समाजसेवी चौधरी मदनपाल सिंह, मुख्य महंत बराहा गिरी सहित अनेक भक्तजन उपस्थित रहे।
पंडित विनोद शर्मा शास्त्री ने धुंधकारी जैसे राक्षस के उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से उसे मुक्ति प्राप्त हुई। उन्होंने पितृ पक्ष में श्रीमद् भागवत पुराण के पाठ के विशेष महत्व पर जोर दिया। उनके अनुसार, पितृ पक्ष में कथा का श्रवण करने से अकाल मृत्यु से ग्रस्त अतृप्त आत्माओं को मोक्ष और सद्गति प्राप्त होती है।
उन्होंने यज्ञ के महत्व को समझाते हुए कहा कि यज्ञ करने से देवता प्रसन्न होते हैं और पर्यावरण शुद्ध होता है। पर्यावरण की शुद्धता से ही महामारी जैसी बीमारियों को दूर किया जा सकता है। इसलिए प्रत्येक मानव को पर्यावरण की रक्षा के लिए यज्ञ करना चाहिए और वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि विवाह या बच्चों के जन्मदिन जैसे शुभ अवसरों पर वृक्षारोपण अवश्य किया जाना चाहिए, क्योंकि प्रकृति हमें स्वच्छ वायु प्रदान करती है।
कथा के अंत में उन्होंने कहा कि भागवत सभी का कल्याण करती है। किसी भी धर्म अनुष्ठान के पूर्ण होने के उपरांत अन्न वितरण का विशेष महत्व है। उन्होंने गरीब और असहाय लोगों को भोजन कराने से भगवान के प्रसन्न होने की बात कही। इस अवसर पर मुख्य यजमान मुकेश सैनी, धर्मपत्नी माया देवी, वरिष्ठ समाजसेवी चौधरी मदनपाल सिंह, मुख्य महंत बराहा गिरी सहित अनेक भक्तजन उपस्थित रहे।