📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhashish Panigrahi
राजनीति
पूर्व पश्चिम बंगाल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा मांगी
✍️ The Times of India
🗓 08 अग. 2026, 02:37 PM
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पश्चिम बंगाल के सीनियर इंटर्नल रिव्यू ट्रिब्यूनल में कार्यरत पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट में सुरक्षा के लिए याचिका दायर की है। वह दावा करते हैं कि उनकी सुरक्षा के लिए यह कदम आवश्यक है।
पश्चिम बंगाल के उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, जो राज्य आंतरिक समीक्षा (SIR) ट्रिब्यूनल के सदस्य रहे हैं, ने सुप्रीम कोर्ट में सुरक्षा के लिए याचिका दायर की है। मंगलवार को दायर की गई यह याचिका बताती है कि उन्हें अपनी सुरक्षा और संपत्ति के लिए वास्तविक खतरे का सामना करना पड़ रहा है। न्यायाधीश ने कोर्ट से सुरक्षा आदेश देने और किसी भी संभावित हमलावर को रोकने का अनुरोध किया है।
पूर्व न्यायाधीश का दावा है कि ये खतरे SIR ट्रिब्यूनल में उनके द्वारा संभाले गए संवेदनशील मामलों से उत्पन्न हुए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपने निवास के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की निगरानी और सुरक्षा दल की नियुक्ति का भी अनुरोध किया है।
याचिका में उन्होंने यह भी कहा है कि इन खतरों के स्रोत की जांच की जानी चाहिए और किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा आदेश उनके कानून का अभ्यास करने या सार्वजनिक टिप्पणी करने के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस याचिका पर कोई निर्णय नहीं दिया है, लेकिन यह उम्मीद की जा रही है कि वे इस अनुरोध की समीक्षा करेंगे और सुरक्षा आदेश देने या न देने का निर्णय लेंगे। यह मामला उन सुरक्षा चिंताओं पर प्रकाश डालता है जिनका सामना उच्च-प्रोफ़ाइल ट्रिब्यूनलों में शामिल न्यायिक अधिकारियों को करना पड़ता है।
पूर्व न्यायाधीश का दावा है कि ये खतरे SIR ट्रिब्यूनल में उनके द्वारा संभाले गए संवेदनशील मामलों से उत्पन्न हुए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपने निवास के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की निगरानी और सुरक्षा दल की नियुक्ति का भी अनुरोध किया है।
याचिका में उन्होंने यह भी कहा है कि इन खतरों के स्रोत की जांच की जानी चाहिए और किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा आदेश उनके कानून का अभ्यास करने या सार्वजनिक टिप्पणी करने के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस याचिका पर कोई निर्णय नहीं दिया है, लेकिन यह उम्मीद की जा रही है कि वे इस अनुरोध की समीक्षा करेंगे और सुरक्षा आदेश देने या न देने का निर्णय लेंगे। यह मामला उन सुरक्षा चिंताओं पर प्रकाश डालता है जिनका सामना उच्च-प्रोफ़ाइल ट्रिब्यूनलों में शामिल न्यायिक अधिकारियों को करना पड़ता है।