📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Archives New Zealand from New Zealand
राजनीति
पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने राजस्थान में वाल्मीकि घुमंतू समुदाय के लिए आरक्षण सुधार की मांग की
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 19 अग. 2026, 10:47 AM
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पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने वाल्मीकि, घुमंतू‑अर्धघुमंतू वर्गों के आरक्षण मुद्दे पर सरकार की नज़रअंदाज़ी की निंदा की और त्वरित सुधार की माँग की।
जयपुर, राजस्थान – पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने एक प्रेस ब्रीफ़िंग में वाल्मीकि, घुमंतू‑अर्धघुमंतू, एससी‑एसटी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की लगातार उपेक्षा को उजागर किया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक सुरक्षा के बावजूद इन समुदायों के कई परिवार अभी भी बुनियादी सेवाओं और शैक्षणिक अवसरों से वंचित हैं।
गुढ़ा ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह वाल्मीकि‑घुमंतू समाज की जनसंख्या वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती। उन्होंने राज्य सरकार से कोटा आवंटन की पुनर्समीक्षा और संशोधन का आग्रह किया, ताकि सबसे कमजोर वर्गों को नौकरियों, छात्रवृत्तियों और कल्याण योजनाओं में उनका उचित हिस्सा मिल सके।
पूर्व मंत्री ने चेतावनी दी कि ऐसी उपेक्षा सामाजिक असमानताओं को और गहरा कर सकती है और ऐतिहासिक रूप से वंचित जनसंख्या में असंतोष को बढ़ा सकती है। उन्होंने समुदाय के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों और नीति विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक समावेशी आरक्षण नीति तैयार करने की सलाह दी।
जबकि सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, गुढ़ा के बयानों ने राजस्थान में घुमंतू और अर्धघुमंतू समुदायों की विशिष्ट चुनौतियों को संबोधित करने के लिए आरक्षण तंत्र को कैसे समायोजित किया जाए, इस पर व्यापक चर्चा को फिर से तेज कर दिया है।
यह मुद्दा आगामी विधायी चर्चाओं में प्रमुखता से उठने की संभावना है, जहाँ हितधारक इन समूहों के आगे के बहिष्कार को रोकने के लिए शीघ्र कार्रवाई का आह्वान कर रहे हैं।
गुढ़ा ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह वाल्मीकि‑घुमंतू समाज की जनसंख्या वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती। उन्होंने राज्य सरकार से कोटा आवंटन की पुनर्समीक्षा और संशोधन का आग्रह किया, ताकि सबसे कमजोर वर्गों को नौकरियों, छात्रवृत्तियों और कल्याण योजनाओं में उनका उचित हिस्सा मिल सके।
पूर्व मंत्री ने चेतावनी दी कि ऐसी उपेक्षा सामाजिक असमानताओं को और गहरा कर सकती है और ऐतिहासिक रूप से वंचित जनसंख्या में असंतोष को बढ़ा सकती है। उन्होंने समुदाय के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों और नीति विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक समावेशी आरक्षण नीति तैयार करने की सलाह दी।
जबकि सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, गुढ़ा के बयानों ने राजस्थान में घुमंतू और अर्धघुमंतू समुदायों की विशिष्ट चुनौतियों को संबोधित करने के लिए आरक्षण तंत्र को कैसे समायोजित किया जाए, इस पर व्यापक चर्चा को फिर से तेज कर दिया है।
यह मुद्दा आगामी विधायी चर्चाओं में प्रमुखता से उठने की संभावना है, जहाँ हितधारक इन समूहों के आगे के बहिष्कार को रोकने के लिए शीघ्र कार्रवाई का आह्वान कर रहे हैं।