📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
पूर्व कर्नाटक सीएम एच.डी. कुमारस्वामी ने पदयात्रा शुरू की, राज्य सरकार को "सबसे भ्रष्ट" कहा
✍️ ANI News
🗓 02 सित. 2026, 02:36 AM
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एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए एक पदयात्रा शुरू की, जिसका उद्देश्य राज्य और देश को बचाना है।
पूर्व कर्नाटक मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने सोमवार को राज्य भर में पदयात्रा शुरू की, वर्तमान सरकार को "सबसे भ्रष्ट" कहकर आलोचना की। जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता ने बताया कि यह पदयात्रा भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने और कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए जन जागरूकता बढ़ाने का माध्यम होगी।
कुमारस्वामी ने कहा कि पदयात्रा के दौरान प्रमुख जिलों में यात्रा की जाएगी, जहाँ स्वयंसेवक हस्ताक्षर एकत्र करेंगे और सार्वजनिक बैठकों का आयोजन करेंगे ताकि वित्त, बुनियादी ढाँचा और कानून‑प्रवर्तन में संभावित दुरुपयोग को सामने लाया जा सके। उन्होंने नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने का आग्रह किया, यह जताते हुए कि भ्रष्टाचार को रोकने और देश के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक कार्रवाई आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पदयात्रा आगामी स्थानीय चुनावों से पहले विपक्ष की सख्त रुख को दर्शाती है। जबकि सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस आंदोलन की करीबी निगरानी करेंगे।
यह पहल क्षेत्रीय नेताओं द्वारा सत्ता में रहने वाली पार्टियों को चुनौती देने के लिए बड़े पैमाने पर जन आंदोलन का उपयोग करने की प्रवृत्ति को दर्शाती है, और राज्य प्रशासन में पारदर्शिता व जवाबदेही की मांग को उजागर करती है।
कुमारस्वामी ने कहा कि पदयात्रा के दौरान प्रमुख जिलों में यात्रा की जाएगी, जहाँ स्वयंसेवक हस्ताक्षर एकत्र करेंगे और सार्वजनिक बैठकों का आयोजन करेंगे ताकि वित्त, बुनियादी ढाँचा और कानून‑प्रवर्तन में संभावित दुरुपयोग को सामने लाया जा सके। उन्होंने नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने का आग्रह किया, यह जताते हुए कि भ्रष्टाचार को रोकने और देश के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक कार्रवाई आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पदयात्रा आगामी स्थानीय चुनावों से पहले विपक्ष की सख्त रुख को दर्शाती है। जबकि सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस आंदोलन की करीबी निगरानी करेंगे।
यह पहल क्षेत्रीय नेताओं द्वारा सत्ता में रहने वाली पार्टियों को चुनौती देने के लिए बड़े पैमाने पर जन आंदोलन का उपयोग करने की प्रवृत्ति को दर्शाती है, और राज्य प्रशासन में पारदर्शिता व जवाबदेही की मांग को उजागर करती है।