📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
राजनीति
बांसवाड़ा के पूर्व सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी और चांदमल जैन ने कांग्रेस में फिर से प्रवेश किया
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 01 सित. 2026, 10:02 AM
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सोमवार को बांसवाड़ा के पूर्व नगर परिषद सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी और पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष चांदमल जैन ने औपचारिक रूप से कांग्रेस में फिर से शामिल हुए।
बांसवाड़ा, राजस्थान – दो वरिष्ठ स्थानीय राजनेता सोमवार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में फिर से शामिल हुए, जिससे आगामी स्थानीय चुनावों से पहले पार्टी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। जैनेंद्र त्रिवेदी, जो पहले बांसवाड़ा नगर परिषद के सभापति रहे थे, ने एक संक्षिप्त प्रेस संवाद में अपना पुनः प्रवेश घोषित किया। साथ ही, चांदमल जैन, जो पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष थे, ने भी पार्टी में फिर से शामिल होने की घोषणा की।
दोनों नेताओं ने कांग्रेस के जमीनी मुद्दों पर पुनः ध्यान और क्षेत्र में एकजुट मोर्चे की आवश्यकता को अपने निर्णय के मुख्य कारण बताया। उनका पुनः प्रवेश बांसवाड़ा में पार्टी की संगठनात्मक संरचना को सुदृढ़ करेगा, जहाँ कांग्रेस ने हाल के समय में अपना प्रभाव घटते देखा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी नगरपालिका चुनावों में मतदाताओं की भावना को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि त्रिवेदी और जैन दोनों के पास व्यापक स्थानीय अनुभव और नेटवर्क है। कांग्रेस ने अभी तक यह नहीं बताया कि इन दोनों को पार्टी के भीतर कौन‑सी विशेष जिम्मेदारियां दी जाएँगी।
पुनः प्रवेश समारोह सरल रहा, बड़े रैलियों के बजाय आंतरिक समर्थन को मजबूत करने पर रणनीतिक ज़ोर दिया गया, क्योंकि चुनावी अभियान तेज़ी से शुरू होने वाला है।
दोनों नेताओं ने कांग्रेस के जमीनी मुद्दों पर पुनः ध्यान और क्षेत्र में एकजुट मोर्चे की आवश्यकता को अपने निर्णय के मुख्य कारण बताया। उनका पुनः प्रवेश बांसवाड़ा में पार्टी की संगठनात्मक संरचना को सुदृढ़ करेगा, जहाँ कांग्रेस ने हाल के समय में अपना प्रभाव घटते देखा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी नगरपालिका चुनावों में मतदाताओं की भावना को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि त्रिवेदी और जैन दोनों के पास व्यापक स्थानीय अनुभव और नेटवर्क है। कांग्रेस ने अभी तक यह नहीं बताया कि इन दोनों को पार्टी के भीतर कौन‑सी विशेष जिम्मेदारियां दी जाएँगी।
पुनः प्रवेश समारोह सरल रहा, बड़े रैलियों के बजाय आंतरिक समर्थन को मजबूत करने पर रणनीतिक ज़ोर दिया गया, क्योंकि चुनावी अभियान तेज़ी से शुरू होने वाला है।