📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
मौसम
नालंदा में बाढ़ का पानी घटा, लेकिन नदियों के डायवर्सन न चालू होने से गांवों का संपर्क बाधित
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 07 सित. 2026, 08:24 AM
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नालंदा में नदियों का जलस्तर घटने के बावजूद, सकरी और मुहाने के डायवर्सन न चालू होने से कई गांवों का संपर्क टूटा है, जिससे लोग 40 किमी तक का चक्कर लगाते हैं या अस्थायी पोल पुल का सहारा लेते हैं।
बिहार के नालंदा जिले में सकरी और मुहाने नदियों का जलस्तर घट गया है, जिससे हालिया बाढ़ की सबसे तीव्र अवस्था समाप्त हो गई है। लेकिन पानी घटने के बावजूद बाढ़‑ग्रस्त गांवों में जीवन सामान्य नहीं हुआ है।
सकरी और मुहाने पर बनाए जा रहे डायवर्सन अभी तक चालू नहीं हुए हैं, जिससे नालंदा और पड़ोसी शेखपुरा के कई गांवों का सड़क संपर्क टूटा हुआ है। डायवर्सन के अभाव में कई गांवों के चारों ओर जलजमाव और क्षतिग्रस्त बांधें बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार उन्हें निकटतम सड़कों तक पहुँचने के लिए 40 किमी तक का चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि कुछ ने जलधारा को पार करने के लिए समुदाय द्वारा बनाए गए अस्थायी पोल पुलों का सहारा लिया है। ये अस्थायी उपाय जलस्तर घटने के बावजूद जारी कठिनाइयों को दर्शाते हैं।
जिला आपदा प्रबंधन टीम के अधिकारियों ने कहा कि डायवर्सन कार्य प्रगति पर है, लेकिन पूर्णता की स्पष्ट तिथि नहीं दी गई है। इस बीच, राहत एजेंसियां जलजमाव वाले गांवों में भोजन और दवाइयों का वितरण जारी रख रही हैं।
सकरी और मुहाने पर बनाए जा रहे डायवर्सन अभी तक चालू नहीं हुए हैं, जिससे नालंदा और पड़ोसी शेखपुरा के कई गांवों का सड़क संपर्क टूटा हुआ है। डायवर्सन के अभाव में कई गांवों के चारों ओर जलजमाव और क्षतिग्रस्त बांधें बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार उन्हें निकटतम सड़कों तक पहुँचने के लिए 40 किमी तक का चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि कुछ ने जलधारा को पार करने के लिए समुदाय द्वारा बनाए गए अस्थायी पोल पुलों का सहारा लिया है। ये अस्थायी उपाय जलस्तर घटने के बावजूद जारी कठिनाइयों को दर्शाते हैं।
जिला आपदा प्रबंधन टीम के अधिकारियों ने कहा कि डायवर्सन कार्य प्रगति पर है, लेकिन पूर्णता की स्पष्ट तिथि नहीं दी गई है। इस बीच, राहत एजेंसियां जलजमाव वाले गांवों में भोजन और दवाइयों का वितरण जारी रख रही हैं।