📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / John Rostron
कृषि
पटनाला में एक ही दिन में पाँच जगह पराली जलाने की घटनाएँ
✍️ Amar Ujala · Patiala
🗓 12 अक्टू. 2026, 06:46 PM
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पटनाला के पाँच अलग-अलग स्थानों पर एक ही दिन पराली जलाने की घटनाएँ दर्ज हुईं, जिससे वायु गुणवत्ता और कृषि प्रथाओं पर सवाल उठे हैं।
पटनाला जिले में एक ही दिन में पाँच अलग-अलग स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएँ दर्ज हुईं, जैसा कि स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया है। इन घटनाओं की सूचना निवासियों ने दी और अग्निशमन विभाग ने पुष्टि की, जिसने प्रत्येक स्थल पर फायर‑ब्रिगेड भेजकर आग को नियंत्रित किया।
कोई चोट या बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ, और कुछ ही घंटों में सभी आगें बुझा दी गईं। फिर भी, जलती पराली से उत्पन्न धुएँ ने वायु में कण पदार्थों की मात्रा बढ़ा दी, जिससे स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील वर्गों को बाहर की गतिविधियों से बचने की सलाह दी।
पंजाब कृषि विभाग ने फिर से कहा कि फसल के अवशेषों का खुला जलाना राज्य के नियमों के तहत प्रतिबंधित है, क्योंकि यह वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। अधिकारियों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने और उल्लंघन करने वालों पर दंड लागू करने का इरादा जताया है।
पर्यावरणीय NGOs ने वैकल्पिक अवशेष प्रबंधन विधियों, जैसे मल्चिंग या बायो‑एनर्जी रूपांतरण, को बढ़ावा देने की मांग की है, ताकि जलाने पर निर्भरता कम की जा सके। इन घटनाओं से कृषि दक्षता और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती फिर से स्पष्ट हुई है।
कोई चोट या बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ, और कुछ ही घंटों में सभी आगें बुझा दी गईं। फिर भी, जलती पराली से उत्पन्न धुएँ ने वायु में कण पदार्थों की मात्रा बढ़ा दी, जिससे स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील वर्गों को बाहर की गतिविधियों से बचने की सलाह दी।
पंजाब कृषि विभाग ने फिर से कहा कि फसल के अवशेषों का खुला जलाना राज्य के नियमों के तहत प्रतिबंधित है, क्योंकि यह वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। अधिकारियों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने और उल्लंघन करने वालों पर दंड लागू करने का इरादा जताया है।
पर्यावरणीय NGOs ने वैकल्पिक अवशेष प्रबंधन विधियों, जैसे मल्चिंग या बायो‑एनर्जी रूपांतरण, को बढ़ावा देने की मांग की है, ताकि जलाने पर निर्भरता कम की जा सके। इन घटनाओं से कृषि दक्षता और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती फिर से स्पष्ट हुई है।