स्थानीय
फर्रुखाबाद: पानी भरे गड्ढे में डूबने से दो मासूम दोस्तों की दर्दनाक मौत, एक साथ उठीं अर्थियां
फर्रुखाबाद के कायमगंज में रविवार को पानी से भरे गड्ढे में डूबने से जान गंवाने वाले दो मासूम दोस्तों सूरज (12) और मोनू (10) के शवों का सोमवार शाम अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस घटना से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के कटरा रहमत खां में सोमवार का दिन बेहद गमगीन रहा। रविवार को पानी से भरे गड्ढे में डूबने से जान गंवाने वाले दो मासूम दोस्तों सूरज (12) और मोनू (10) के शव पोस्टमार्टम के बाद सोमवार शाम करीब 4 बजे गांव पहुंचे। दोनों के घर एक-दूसरे से महज करीब 20 मीटर की दूरी पर थे और बचपन से उनकी दोस्ती इतनी गहरी थी कि लोग उन्हें अक्सर साथ ही देखते थे। रविवार को हुए इस दुखद हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं।
शव घर पहुंचते ही दोनों परिवारों में चीख-पुकार मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव में भी मातम का माहौल रहा। बताया गया कि हादसे के बाद से दोनों परिवारों के घरों में चूल्हा तक नहीं जला। शाम करीब 5:30 बजे जब सूरज और मोनू की अर्थियां एक साथ घर से उठीं तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। एक तरफ दो परिवार अपने मासूम बेटों को अंतिम विदाई दे रहे थे, तो दूसरी तरफ पूरा गांव उनकी अटूट दोस्ती को याद कर रहा था।
दोनों बच्चों के पिता मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं और परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई गई है। बच्चों की मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और सभी ने दोनों मासूमों को अंतिम श्रद्धांजलि दी। देर शाम करीब 6:30 बजे बूढ़ी गंगा के पास दोनों दोस्तों का अंतिम संस्कार किया गया। एक ही गली में रहने वाले दो दोस्त अब हमेशा के लिए एक-दूसरे से बिछड़ गए, जिनकी अंतिम यात्रा भी एक साथ निकली।
शव घर पहुंचते ही दोनों परिवारों में चीख-पुकार मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव में भी मातम का माहौल रहा। बताया गया कि हादसे के बाद से दोनों परिवारों के घरों में चूल्हा तक नहीं जला। शाम करीब 5:30 बजे जब सूरज और मोनू की अर्थियां एक साथ घर से उठीं तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। एक तरफ दो परिवार अपने मासूम बेटों को अंतिम विदाई दे रहे थे, तो दूसरी तरफ पूरा गांव उनकी अटूट दोस्ती को याद कर रहा था।
दोनों बच्चों के पिता मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं और परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई गई है। बच्चों की मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और सभी ने दोनों मासूमों को अंतिम श्रद्धांजलि दी। देर शाम करीब 6:30 बजे बूढ़ी गंगा के पास दोनों दोस्तों का अंतिम संस्कार किया गया। एक ही गली में रहने वाले दो दोस्त अब हमेशा के लिए एक-दूसरे से बिछड़ गए, जिनकी अंतिम यात्रा भी एक साथ निकली।