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फर्रुखाबाद के कम्पिल में 100 साल पुरानी रामलीला: भव्य शिव बारात का निकला जुलूस
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फर्रुखाबाद जिले के कम्पिल में 100 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही रामलीला महोत्सव के तहत बुधवार रात भगवान शिव की बारात का भव्य जुलूस निकाला गया। इस दौरान विभिन्न झांकियों और काली अखाड़े ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
फर्रुखाबाद जिले के कम्पिल में इन दिनों 100 साल पुरानी रामलीला महोत्सव का आयोजन बड़े ही धूमधाम से किया जा रहा है। बुधवार की रात रामलीला मैदान से भगवान शिव की बारात का जुलूस अत्यंत भव्यता के साथ निकाला गया, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।
रात्रि लगभग 8 बजे रामलीला मैदान से प्रारंभ हुई इस बारात में भगवान गणेश और कृष्ण की मनमोहक झांकियां शामिल थीं। बैंड-बाजों और डीजे की धुन पर भक्त झूमते रहे, वहीं भगवान शंकर एक रथनुमा झांकी पर सवार होकर निकले। बारात में विशेष रूप से शामिल काली का अखाड़ा लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में स्थानीय निवासी और श्रद्धालु उमड़ पड़े।
बारात का मार्ग रामलीला मैदान से शुरू होकर थाने, मुख्य बाजार और गंगा रोड से होते हुए रामेश्वर नाथ मंदिर तक गया। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने बारात का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और भगवान शिव की आरती उतारी। लगभग आधी रात 12 बजे बारात वापस रामलीला मैदान पहुंची, जहाँ इसका समापन हुआ।
इस रामलीला महोत्सव में दिन के समय स्थानीय कलाकार रामलीला का मंचन करते हैं, जबकि रात में बाहर से आए कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस बल द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। रामलीला कमेटी ने इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। देर रात तक रामलीला मैदान और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा।
रात्रि लगभग 8 बजे रामलीला मैदान से प्रारंभ हुई इस बारात में भगवान गणेश और कृष्ण की मनमोहक झांकियां शामिल थीं। बैंड-बाजों और डीजे की धुन पर भक्त झूमते रहे, वहीं भगवान शंकर एक रथनुमा झांकी पर सवार होकर निकले। बारात में विशेष रूप से शामिल काली का अखाड़ा लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में स्थानीय निवासी और श्रद्धालु उमड़ पड़े।
बारात का मार्ग रामलीला मैदान से शुरू होकर थाने, मुख्य बाजार और गंगा रोड से होते हुए रामेश्वर नाथ मंदिर तक गया। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों ने बारात का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और भगवान शिव की आरती उतारी। लगभग आधी रात 12 बजे बारात वापस रामलीला मैदान पहुंची, जहाँ इसका समापन हुआ।
इस रामलीला महोत्सव में दिन के समय स्थानीय कलाकार रामलीला का मंचन करते हैं, जबकि रात में बाहर से आए कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस बल द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। रामलीला कमेटी ने इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। देर रात तक रामलीला मैदान और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा।