📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / U.S. Secretary of Defense
विदेश
विदेश मंत्री जयशंकर ने मध्यम शक्ति देशों से संसाधन साझा कर विश्व व्यवस्था बदलने का आह्वान किया
✍️ Asianet Newsable
🗓 04 अक्टू. 2026, 09:16 PM
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एक हालिया बयान में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मध्यम शक्ति देशों से विश्व व्यवस्था को आकार देने के लिए अपने संसाधनों को मिलाने का आग्रह किया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मध्यम शक्ति देशों को अपने संसाधनों को मिलाकर अंतरराष्ट्रीय मामलों में अधिक प्रभाव डालने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान भू‑राजनीतिक परिदृश्य में चुनौतियों और अवसरों दोनों ही हैं, जिन्हें संयुक्त कार्रवाई से बेहतर ढंग से संभाला जा सकता है।
जयशंकर ने बताया कि कूटनीति, आर्थिक और तकनीकी क्षमताओं को एकत्रित करने से इन देशों को प्रमुख शक्ति देशों के पारंपरिक प्रभुत्व का संतुलित विकल्प प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से लेकर सुरक्षा मुद्दों तक के वैश्विक चुनौतियों को मिलकर हल करने की संभावना को रेखांकित किया।
यह बयान भारत के समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग को गहरा करने के प्रयासों के साथ आया है, जिसमें भारत को बड़े ब्लॉकों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सेतु के रूप में स्थापित किया जा रहा है। जयशंकर ने संसाधन साझाकरण और संयुक्त पहलों को साकार करने के लिए ठोस तंत्र बनाने का आह्वान किया, जिससे विश्व व्यवस्था को पुनः आकार दिया जा सके।
हालांकि किसी विशेष मंच या समझौते का उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन जयशंकर की यह अपील वैश्विक निर्णय‑निर्माण प्रक्रियाओं में अधिक देशों को सशक्त बनाने की व्यापक कूटनीतिक दिशा को दर्शाती है।
जयशंकर ने बताया कि कूटनीति, आर्थिक और तकनीकी क्षमताओं को एकत्रित करने से इन देशों को प्रमुख शक्ति देशों के पारंपरिक प्रभुत्व का संतुलित विकल्प प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से लेकर सुरक्षा मुद्दों तक के वैश्विक चुनौतियों को मिलकर हल करने की संभावना को रेखांकित किया।
यह बयान भारत के समान विचारधारा वाले देशों के साथ सहयोग को गहरा करने के प्रयासों के साथ आया है, जिसमें भारत को बड़े ब्लॉकों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सेतु के रूप में स्थापित किया जा रहा है। जयशंकर ने संसाधन साझाकरण और संयुक्त पहलों को साकार करने के लिए ठोस तंत्र बनाने का आह्वान किया, जिससे विश्व व्यवस्था को पुनः आकार दिया जा सके।
हालांकि किसी विशेष मंच या समझौते का उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन जयशंकर की यह अपील वैश्विक निर्णय‑निर्माण प्रक्रियाओं में अधिक देशों को सशक्त बनाने की व्यापक कूटनीतिक दिशा को दर्शाती है।