स्थानीय
एटा पुलिस द्वारा साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के तहत व्यापक अभियान
यहाँ देखें:
▶️ YouTube
एटा पुलिस ने साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के उपलक्ष्य में स्कूली छात्रों और आम नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया है।
एटा: साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के अवसर पर, जनपदीय पुलिस द्वारा साइबर अपराधों से आमजन को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक श्वेताभ पाण्डेय के पर्यवेक्षण में, क्षेत्राधिकारी साइबर नीतीश गर्ग के नेतृत्व में यह अभियान संचालित किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत, जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस कर्मियों द्वारा विद्यालयों, कॉलेजों, बाजारों और ग्राम सभाओं में जाकर छात्र-छात्राओं तथा आम नागरिकों को साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों, जैसे फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी, फिशिंग लिंक, बैंकिंग फ्रॉड और सोशल मीडिया हैकिंग आदि के बारे में जागरूक किया जा रहा है। पुलिस द्वारा लोगों को यह महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल या लिंक पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, ओटीपी, बैंक विवरण या पासवर्ड साझा न करें।
साइबर ठगी की घटनाओं की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए, नागरिकों को टोल फ्री नंबर 1930 पर या वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जनपदीय पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे स्वयं सतर्क रहें और दूसरों को भी साइबर अपराधों से बचने के लिए जागरूक करें।
जागरूकता के नियमों में यह भी बताया गया है कि किसी परिचित की आवाज से ऑनलाइन उधार मांगने पर पहले पुष्टि कर लें, सरकारी अधिकारी बनकर सस्ते सामान बेचने के झांसे में न आएं, फर्जी ट्रेडिंग ऐप में निवेश से बचें, और ऑनलाइन भुगतान के लिए यूपीआई पिन की आवश्यकता होती है, भुगतान प्राप्त करने के लिए नहीं। इसके अतिरिक्त, कार्ड नंबर, सीवीवी और ओटीपी किसी के साथ साझा न करने, सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या तस्वीर को पोस्ट या फॉरवर्ड करने से पहले उसकी सच्चाई जांचने, और कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता किसी को न देने की सलाह दी गई है। विदेश में नौकरी के नाम पर ऑनलाइन फेक जॉब ऑफर और बीमा के नाम पर लोन/सब्सिडी आदि के लिए आए किसी भी अनजान लिंक को न खोलने की हिदायत भी दी गई है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। "सावधानी ही सुरक्षा है — सतर्क नागरिक ही सुरक्षित नागरिक है।"
इस अभियान के तहत, जनपद के सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस कर्मियों द्वारा विद्यालयों, कॉलेजों, बाजारों और ग्राम सभाओं में जाकर छात्र-छात्राओं तथा आम नागरिकों को साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों, जैसे फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी, फिशिंग लिंक, बैंकिंग फ्रॉड और सोशल मीडिया हैकिंग आदि के बारे में जागरूक किया जा रहा है। पुलिस द्वारा लोगों को यह महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल या लिंक पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, ओटीपी, बैंक विवरण या पासवर्ड साझा न करें।
साइबर ठगी की घटनाओं की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए, नागरिकों को टोल फ्री नंबर 1930 पर या वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जनपदीय पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे स्वयं सतर्क रहें और दूसरों को भी साइबर अपराधों से बचने के लिए जागरूक करें।
जागरूकता के नियमों में यह भी बताया गया है कि किसी परिचित की आवाज से ऑनलाइन उधार मांगने पर पहले पुष्टि कर लें, सरकारी अधिकारी बनकर सस्ते सामान बेचने के झांसे में न आएं, फर्जी ट्रेडिंग ऐप में निवेश से बचें, और ऑनलाइन भुगतान के लिए यूपीआई पिन की आवश्यकता होती है, भुगतान प्राप्त करने के लिए नहीं। इसके अतिरिक्त, कार्ड नंबर, सीवीवी और ओटीपी किसी के साथ साझा न करने, सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या तस्वीर को पोस्ट या फॉरवर्ड करने से पहले उसकी सच्चाई जांचने, और कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता किसी को न देने की सलाह दी गई है। विदेश में नौकरी के नाम पर ऑनलाइन फेक जॉब ऑफर और बीमा के नाम पर लोन/सब्सिडी आदि के लिए आए किसी भी अनजान लिंक को न खोलने की हिदायत भी दी गई है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और पुलिस कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। "सावधानी ही सुरक्षा है — सतर्क नागरिक ही सुरक्षित नागरिक है।"