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06 Oct 2026•
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Health

एटा-जैथरा में एक ही दवा की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर, मरीजों की जेब पर भारी बोझ

✍️ Reporter: शैलेष गुप्ता महाजन 🗓 06 Oct 2026, 12:27 PM 👁 15
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एटा और जैथरा में एक ही कंपोजिशन वाली दवाओं की कीमतों में भारी अंतर सामने आया है। जनऔषधि केंद्रों और प्रिंटेड रेट के मुकाबले बाजार में दवाओं की कीमत कई गुना अधिक होने का दावा किया गया है।

एटा/जैथरा। मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एक ही कंपोजिशन की दवा अलग-अलग कंपनियों के नाम से बाजार में अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध है, वहीं जनऔषधि केंद्रों और सामान्य मेडिकल स्टोरों के बीच कीमतों में भारी अंतर होने का दावा सामने आया है।

मोंटेलुकास्ट और लेवोसिटिरिजीन के कंपोजिशन वाली दवा के उदाहरण में Cipla की Montair-LC की 15 टैबलेट वाली स्ट्रिप का प्रिंटेड रेट ₹417 बताया जा रहा है, यानी प्रति टैबलेट करीब ₹27.80। दावा है कि यही स्ट्रिप बाजार में लगभग ₹300 से ₹345 तक में मिलती है। वहीं Intas की Montas-L नाम की 10 टैबलेट वाली स्ट्रिप का प्रिंटेड रेट ₹183 है, जो बाजार में ₹120 से ₹150 तक मिलने की बात कही जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ दुकानों पर यही स्ट्रिप मात्र ₹30-35 में मिलने का दावा किया गया है, जबकि जनऔषधि केंद्रों में इसी प्रकार की दवा की 10 टैबलेट की स्ट्रिप लगभग ₹20.63 में उपलब्ध है।

मरीजों के सामने बड़ा सवाल तब उठता है जब वे डॉक्टर की पर्ची लेकर मेडिकल स्टोर पहुंचते हैं और अक्सर जो कीमत बताई जाती है, वही भुगतान कर देते हैं, बिना कंपनी, कंपोजिशन या वास्तविक खरीद मूल्य के अंतर को समझे। विशेष रूप से अस्पताल या क्लिनिक परिसर में मौजूद स्टोरों से दवा खरीदने वाले मरीजों को प्रिंटेड रेट के आसपास भुगतान करना पड़ता है, जिससे वास्तविक बिक्री मूल्य और उपलब्ध छूट की जांच की जरूरत पड़ती है।

ऐसे में संबंधित औषधि नियंत्रण विभाग और सक्षम अधिकारियों को यह जांचना चाहिए कि अलग-अलग दुकानों पर दवा किस कीमत पर बेची जा रही है, दुकानदारों को कंपनी से दवा किस कीमत पर मिल रही है और मरीजों को कितना डिस्काउंट दिया जा रहा है। साथ ही यह भी देखना होगा कि प्रिंटेड रेट और वास्तविक बिक्री मूल्य में कितना अंतर है, अस्पताल परिसर की दुकानों पर बिक्री किस दर पर हो रही है और क्या मरीजों को दवा का बिल दिया जा रहा है या कम कीमत वाले विकल्पों की जानकारी दी जाती है।

दवा इलाज है, मुनाफे का खेल नहीं। मरीज पहले से ही बीमारी और जांच के खर्च से परेशान रहता है, ऐसे में एक ही कंपोजिशन वाली दवा के लिए कई गुना कीमत चुकाना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब जरूरत पारदर्शी जांच की है ताकि मरीज को सही दवा सही कीमत पर मिल सके और उसकी जेब पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम हो सके।
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