📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Christopher Voitus
अपराध
सतना के सेवा सहकारी समिति के पूर्व प्रबंधक पर ईओडब्ल्यू ने भ्रष्टाचार व धोखाधड़ी के दो मामले दर्ज
✍️ Amar Ujala · Satna
🗓 25 अक्टू. 2026, 12:31 PM
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मध्य प्रदेश के रीवा आर्थिक अपराध शाखा ने सतना की अमकुई सेवा सहकारी समिति के पूर्व प्रभारी प्रबंधक सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ दो मामले दर्ज किए हैं, क्योंकि उनकी वैध आय 17 लाख रुपये के बावजूद खर्च 57 लाख रुपये से अधिक है।
मध्य प्रदेश के रीवा आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने सतना की सेवा सहकारी समिति अमकुई के पूर्व प्रभारी प्रबंधक सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ दो अलग‑अलग आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं, क्योंकि बघेल ने अपनी वैध आय 17 लाख रुपये बताई है, जबकि उनके खर्च 57 लाख रुपये से अधिक दर्ज किए गए हैं।
जांचकर्ताओं का कहना है कि आय‑और‑व्यय में इस बड़े अंतर से अनियमित आय स्रोतों और सहकारी निधियों के दुरुपयोग का संदेह उत्पन्न होता है। ईओडब्ल्यू ने इस अंतर के मूल कारणों की पहचान करने और यह पता लगाने के लिए औपचारिक जांच शुरू कर दी है कि सार्वजनिक या सहकारी संसाधनों का निजी उपयोग तो नहीं हुआ।
बघेल, जो हाल ही में अपने प्रबंधकीय पद से हटाए गए थे, को अभी तक हिरासत में नहीं लिया गया है, पर ईओडब्ल्यू ने उन्हें पूछताछ के लिए हाज़िर होने का नोटिस जारी किया है। विभाग ने संबंधित वित्तीय दस्तावेज़ और सहकारी खाते की विवरणी भी जब्त कर ली है।
इन दो मामलों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य के प्रवर्तन एजेंसियां स्थानीय सहकारी संस्थाओं में वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए सतर्क हैं, क्योंकि ये संस्थाएं क्षेत्रीय विकास और जनकल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
जांच के आगे के परिणाम और न्यायालय की कार्यवाही के बारे में आगे की जानकारी उपलब्ध होते ही साझा की जाएगी।
जांचकर्ताओं का कहना है कि आय‑और‑व्यय में इस बड़े अंतर से अनियमित आय स्रोतों और सहकारी निधियों के दुरुपयोग का संदेह उत्पन्न होता है। ईओडब्ल्यू ने इस अंतर के मूल कारणों की पहचान करने और यह पता लगाने के लिए औपचारिक जांच शुरू कर दी है कि सार्वजनिक या सहकारी संसाधनों का निजी उपयोग तो नहीं हुआ।
बघेल, जो हाल ही में अपने प्रबंधकीय पद से हटाए गए थे, को अभी तक हिरासत में नहीं लिया गया है, पर ईओडब्ल्यू ने उन्हें पूछताछ के लिए हाज़िर होने का नोटिस जारी किया है। विभाग ने संबंधित वित्तीय दस्तावेज़ और सहकारी खाते की विवरणी भी जब्त कर ली है।
इन दो मामलों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य के प्रवर्तन एजेंसियां स्थानीय सहकारी संस्थाओं में वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए सतर्क हैं, क्योंकि ये संस्थाएं क्षेत्रीय विकास और जनकल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
जांच के आगे के परिणाम और न्यायालय की कार्यवाही के बारे में आगे की जानकारी उपलब्ध होते ही साझा की जाएगी।