📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensi
अपराध
ईओयू ने डीए केस में ट्रांसपोर्ट विभाग के एसआई के कार्यालय पर छापा मारा
✍️ The Times of India
🗓 30 सित. 2026, 06:01 PM
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आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने डीए जांच के तहत ट्रांसपोर्ट विभाग के एक सब‑इंस्पेक्टर के कार्यालय में छापा मारा, अधिकारियों ने बताया।
आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने राज्य के ट्रांसपोर्ट विभाग के एक सब‑इंस्पेक्टर के कार्यालय में छापेमारी की। यह कार्रवाई एक चल रहे डीए मामले से जुड़ी है, हालांकि मामले के विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, ईओयू के अधिकारी सुबह के शुरुआती समय में पहुंचे, परिसर को सुरक्षित किया और सबूत इकट्ठा करना शुरू किया। सब‑इंस्पेक्टर के कर्मचारियों को बाहर ले जाया गया, जबकि जांच टीम ने दस्तावेज़, कंप्यूटर और अन्य सामग्री की जांच की जो जांच के लिए प्रासंगिक हो सकती है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने शामिल अधिकारियों के नाम या जांच के विशेष आरोपों को नहीं बताया है। यह छापेमारी विभिन्न सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं पर केंद्रित एजेंसियों की निरंतरता को दर्शाती है।
अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, और ट्रांसपोर्ट विभाग ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है। जांच जारी है और ईओयू के आगे के कदमों के साथ अतिरिक्त जानकारी मिलने की संभावना है।
यह घटना सार्वजनिक अधिकारियों के वित्तीय अपराध जांच में बढ़ती निगरानी को उजागर करती है, जिससे यह संदेश मिलता है कि विभाग चाहे जो भी हो, कथित दुराचार को सख्ती से सजा दी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, ईओयू के अधिकारी सुबह के शुरुआती समय में पहुंचे, परिसर को सुरक्षित किया और सबूत इकट्ठा करना शुरू किया। सब‑इंस्पेक्टर के कर्मचारियों को बाहर ले जाया गया, जबकि जांच टीम ने दस्तावेज़, कंप्यूटर और अन्य सामग्री की जांच की जो जांच के लिए प्रासंगिक हो सकती है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने शामिल अधिकारियों के नाम या जांच के विशेष आरोपों को नहीं बताया है। यह छापेमारी विभिन्न सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं पर केंद्रित एजेंसियों की निरंतरता को दर्शाती है।
अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, और ट्रांसपोर्ट विभाग ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है। जांच जारी है और ईओयू के आगे के कदमों के साथ अतिरिक्त जानकारी मिलने की संभावना है।
यह घटना सार्वजनिक अधिकारियों के वित्तीय अपराध जांच में बढ़ती निगरानी को उजागर करती है, जिससे यह संदेश मिलता है कि विभाग चाहे जो भी हो, कथित दुराचार को सख्ती से सजा दी जाएगी।