📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Dani Charles, silverscreen.in
राजनीति
डिएमके ने विजय के इशारे को आरएसएस सलाम कहा, तमिलनाडु में आरक्षण पर गर्मा-गर्म बहस
✍️ India Today
🗓 16 अक्टू. 2026, 06:46 AM
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ड्रविड़ मुनेत्र कजगम (डिएमके) ने अभिनेता विजय के हालिया इशारे को आरएसएस सलाम कहा, जिससे तमिलनाडु में आरक्षण नीति पर चल रही बहस और तेज हो गई है।
तमिलनाडु में आरक्षण नीति को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है, जब शासक द्रविड़ मुनेत्र कजगम (डिएमके) ने लोकप्रिय अभिनेता विजय के हालिया इशारे को आरएसएस सलाम से तुलना की। पार्टी के प्रवक्ता ने इस इशारे को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सलाम जैसा कहा, जिससे सोशल मीडिया और विधानसभा दोनों में तीखी बहस छिड़ गई।
विजय ने सार्वजनिक कार्यक्रम में यह इशारा दिखाया, जबकि उन्होंने इस कदम के राजनीतिक अर्थ पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की। विपक्षी दलों ने इस अवसर का फायदा उठाकर उनके राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ जुड़ाव पर सवाल उठाए।
डिएमके के नेताओं का कहना है कि तमिलनाडु, जिसकी द्रविड़ धर्मनिरपेक्ष परम्परा जानी जाती है, में आरएसएस सलाम का उल्लेख सांस्कृतिक मूल्यों को कमजोर करता है। वे यह भी जोड़ते हैं कि इस इशारे पर ध्यान केंद्रित करना पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के आरक्षण को लेकर वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना डिएमके की आगामी राज्य चुनावों से पहले एंटी‑आरएसएस भावना को जगाने की रणनीति को दर्शाती है। पार्टी की आलोचना उसके मुख्य मतदाता वर्ग के साथ तालमेल बिठाने की संभावना रखती है, जो केंद्रीय राष्ट्रवादी विचारधारा के संभावित थोपे जाने को लेकर सतर्क है।
जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ रही है, नागरिक समूह और कानूनी विशेषज्ञ किसी भी औपचारिक शिकायत या याचिका पर नजर रखे हुए हैं, जबकि विजय के समर्थक उनका इशारा गैर‑राजनीतिक बताकर बचाव कर रहे हैं।
विजय ने सार्वजनिक कार्यक्रम में यह इशारा दिखाया, जबकि उन्होंने इस कदम के राजनीतिक अर्थ पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की। विपक्षी दलों ने इस अवसर का फायदा उठाकर उनके राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ जुड़ाव पर सवाल उठाए।
डिएमके के नेताओं का कहना है कि तमिलनाडु, जिसकी द्रविड़ धर्मनिरपेक्ष परम्परा जानी जाती है, में आरएसएस सलाम का उल्लेख सांस्कृतिक मूल्यों को कमजोर करता है। वे यह भी जोड़ते हैं कि इस इशारे पर ध्यान केंद्रित करना पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के आरक्षण को लेकर वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना डिएमके की आगामी राज्य चुनावों से पहले एंटी‑आरएसएस भावना को जगाने की रणनीति को दर्शाती है। पार्टी की आलोचना उसके मुख्य मतदाता वर्ग के साथ तालमेल बिठाने की संभावना रखती है, जो केंद्रीय राष्ट्रवादी विचारधारा के संभावित थोपे जाने को लेकर सतर्क है।
जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ रही है, नागरिक समूह और कानूनी विशेषज्ञ किसी भी औपचारिक शिकायत या याचिका पर नजर रखे हुए हैं, जबकि विजय के समर्थक उनका इशारा गैर‑राजनीतिक बताकर बचाव कर रहे हैं।