📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Alokjain19883105
बिज़नेस
दीवाली 2026 के त्योहारी व्यापार का मूल्य 7 लाख करोड़ रुपये पार
✍️ India Business Trade
🗓 09 नव. 2026, 01:46 AM
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विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 की दीवाली में कुल खुदरा‑सेवा खर्च 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा।
भारत का सबसे बड़ा खरीदारी उत्सव 2026 में अभूतपूर्व आर्थिक गतिविधि लाने वाला है, जहाँ इंडिया बिजनेस ट्रेड के आंकड़े दर्शाते हैं कि कुल त्योहारी लेन‑देनों का मूल्य 7 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जाएगा। यह अनुमान पारंपरिक खुदरा, सोने‑ज्वेलरी, ऑनलाइन मार्केटप्लेस, यात्रा बुकिंग और उपभोक्ता वस्तुओं सहित कई क्षेत्रों को सम्मिलित करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती उपलब्ध आय, डिजिटल अपनाने में तेजी और दोनों प्रकार के विक्रेताओं द्वारा चलाए जा रहे प्रचंड प्रचार अभियान इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। सोना और ज्वेलरी, जो दीवाली के मुख्य आकर्षण रहे हैं, सबसे अधिक मांग देखेंगे, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, परिधान और ऑटोमोबाइल एक्सेसरीज़ जैसे वर्ग भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
इतनी बड़ी खर्चीली मात्रा से भारतीय अर्थव्यवस्था को अल्पकालिक प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे जीएसटी संग्रह में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में मौसमी रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पिछले वर्ष की तुलना में यह अनुमान स्पष्ट रूप से ऊपर की ओर है, जो उपभोक्ता‑प्रधान वृद्धि में त्योहारी मौसम की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
हालाँकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि आपूर्ति‑श्रृंखला में बाधाएँ और महंगाई के दबाव अंतिम आंकड़ों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए वास्तविक परिणाम व्यापक आर्थिक स्थिरता पर निर्भर करेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती उपलब्ध आय, डिजिटल अपनाने में तेजी और दोनों प्रकार के विक्रेताओं द्वारा चलाए जा रहे प्रचंड प्रचार अभियान इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। सोना और ज्वेलरी, जो दीवाली के मुख्य आकर्षण रहे हैं, सबसे अधिक मांग देखेंगे, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, परिधान और ऑटोमोबाइल एक्सेसरीज़ जैसे वर्ग भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
इतनी बड़ी खर्चीली मात्रा से भारतीय अर्थव्यवस्था को अल्पकालिक प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे जीएसटी संग्रह में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में मौसमी रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पिछले वर्ष की तुलना में यह अनुमान स्पष्ट रूप से ऊपर की ओर है, जो उपभोक्ता‑प्रधान वृद्धि में त्योहारी मौसम की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
हालाँकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि आपूर्ति‑श्रृंखला में बाधाएँ और महंगाई के दबाव अंतिम आंकड़ों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए वास्तविक परिणाम व्यापक आर्थिक स्थिरता पर निर्भर करेगा।