📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ramesh Lalwani
अपराध
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर प्रदर्शन पर महिला पत्रकार के खिलाफ FIR दर्ज की
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 14 अक्टू. 2026, 06:36 PM
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दिल्ली पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में जंतर-मंतर के पास हुए प्रदर्शन से जुड़े एक स्वतंत्र महिला पत्रकार और कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है, साथ ही एक एसीपी के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी के लिए कार्रवाई की है।
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को जंतर-मंतर के पास मई के शुरुआती दिनों में हुए प्रदर्शन के बाद एक स्वतंत्र महिला पत्रकार और कई अन्य व्यक्तियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की। FIR में कहा गया है कि इन लोगों ने सार्वजनिक व्यवस्था के नियमों का उल्लंघन किया।
जांच में एक फ्रीलांस आउटलेट की महिला रिपोर्टर को भी शामिल किया गया है, जिसे प्रदर्शन के दौरान उकसावे के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने बताया कि इस FIR में उस रैली में मौजूद कई अनाम व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।
इसी दौरान, एक एसीपी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है, क्योंकि एक शिकायत में कहा गया है कि अधिकारी ने उसी घटना के दौरान जातिसूचक टिप्पणी की थी। विभाग ने एक आंतरिक जांच का आदेश दिया है और एसीपी को अस्थायी रूप से उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया गया है।
पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि FIR और अनुशासनात्मक जांच दोनों ही व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामान्य प्रक्रिया हैं और उन्होंने जातिसूचक टिप्पणी के विवरण पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
पत्रकार संघों और नागरिक अधिकार समूहों ने पारदर्शी जांच की मांग की है, साथ ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करते हुए कार्रवाई की तेज़ी और निष्पक्षता की भी अपील की है।
जांच में एक फ्रीलांस आउटलेट की महिला रिपोर्टर को भी शामिल किया गया है, जिसे प्रदर्शन के दौरान उकसावे के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने बताया कि इस FIR में उस रैली में मौजूद कई अनाम व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।
इसी दौरान, एक एसीपी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है, क्योंकि एक शिकायत में कहा गया है कि अधिकारी ने उसी घटना के दौरान जातिसूचक टिप्पणी की थी। विभाग ने एक आंतरिक जांच का आदेश दिया है और एसीपी को अस्थायी रूप से उनके कर्तव्यों से मुक्त कर दिया गया है।
पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि FIR और अनुशासनात्मक जांच दोनों ही व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामान्य प्रक्रिया हैं और उन्होंने जातिसूचक टिप्पणी के विवरण पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
पत्रकार संघों और नागरिक अधिकार समूहों ने पारदर्शी जांच की मांग की है, साथ ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करते हुए कार्रवाई की तेज़ी और निष्पक्षता की भी अपील की है।