📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Avrajyoti Mitra
देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने एमपी सरकार को सीनियर अधिवक्ता को 78 लाख रुपये से अधिक फीस देने का आदेश दिया
✍️ Live Law
🗓 02 सित. 2026, 09:38 AM
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दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को सीनियर अधिवक्ता को 78 लाख रुपये से अधिक की फीस देनी होगी, राज्य के अपवाद के दावे को खारिज किया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को सीनियर अधिवक्ता को 78 लाख रुपये से अधिक की बकाया फीस चुकाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य कोई भी वैधानिक अपवाद नहीं ले सकता और पेशेवर कानूनी शुल्क का भुगतान अनिवार्य है।
संबंधित अधिवक्ता ने पूर्व में मध्य प्रदेश सरकार की एक मुकदमे में प्रतिनिधित्व करने के बाद बकाया राशि के लिए याचिका दायर की थी। कोर्ट ने अधिवक्ता अधिनियम और संबंधित नियमों की जाँच कर यह निष्कर्ष निकाला कि फीस का दावा वैध और लागू है।
आदेश में न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि भुगतान करने का निर्देश दिया, अन्यथा अवमानना कार्यवाही शुरू की जा सकती है। यह निर्णय राज्य संस्थाओं और सीनियर अधिवक्ताओं के बीच समान शुल्क विवादों के लिए मिसाल बन सकता है।
मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक इस फैसले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, और कानूनी सलाहकार अनुपालन के बारे में मार्गदर्शन देंगे। यह मामला राज्य की कानूनी पेशेवरों को अनुबंधीय दायित्वों को पूरा करने में जवाबदेही को उजागर करता है, जिससे सरकारी वित्तीय लेन‑देनों में कानून का शासन सुदृढ़ होता है।
संबंधित अधिवक्ता ने पूर्व में मध्य प्रदेश सरकार की एक मुकदमे में प्रतिनिधित्व करने के बाद बकाया राशि के लिए याचिका दायर की थी। कोर्ट ने अधिवक्ता अधिनियम और संबंधित नियमों की जाँच कर यह निष्कर्ष निकाला कि फीस का दावा वैध और लागू है।
आदेश में न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि भुगतान करने का निर्देश दिया, अन्यथा अवमानना कार्यवाही शुरू की जा सकती है। यह निर्णय राज्य संस्थाओं और सीनियर अधिवक्ताओं के बीच समान शुल्क विवादों के लिए मिसाल बन सकता है।
मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक इस फैसले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, और कानूनी सलाहकार अनुपालन के बारे में मार्गदर्शन देंगे। यह मामला राज्य की कानूनी पेशेवरों को अनुबंधीय दायित्वों को पूरा करने में जवाबदेही को उजागर करता है, जिससे सरकारी वित्तीय लेन‑देनों में कानून का शासन सुदृढ़ होता है।