📷 चित्र स्रोत: TOI City (via NewsData)
शिक्षा
दिल्ली हाई कोर्ट ने JNU प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अकोजम की निलंबन को रोक दिया
✍️ TOI City
🗓 03 नव. 2026, 07:49 AM
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दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के उस फैसले को रोक दिया है जिसमें कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोजम को यौन उत्पीड़न की शिकायतों के बाद नौकरी से हटाया गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोजम के निलंबन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। अकोजम द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है, जिससे विश्वविद्यालय द्वारा लिया गया निलंबन का फैसला फिलहाल प्रभावी नहीं होगा।
यह मामला तब शुरू हुआ जब कई महिला छात्राओं ने अकोजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। इन शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक आंतरिक जांच शुरू की थी। इस जांच की सिफारिशों के आधार पर JNU ने अकोजम को नौकरी से हटाने का फैसला लिया था।
अकोजम ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दावा किया कि आंतरिक जांच की प्रक्रिया में अनियमितताएं थीं। उन्होंने न्यायालय में तर्क दिया कि उन्हें उचित सुनवाई और निष्पक्ष जांच का अधिकार नहीं मिला।
यह न्यायिक निर्णय भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न के मामलों के संभालने की प्रक्रिया पर नया प्रकाश डालता है। यह मामला संस्थानों की अनुशासनिक शक्तियों और आरोपितों के न्यायिक अधिकारों के बीच संतुलन को दर्शाता है।
यह मामला तब शुरू हुआ जब कई महिला छात्राओं ने अकोजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। इन शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक आंतरिक जांच शुरू की थी। इस जांच की सिफारिशों के आधार पर JNU ने अकोजम को नौकरी से हटाने का फैसला लिया था।
अकोजम ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दावा किया कि आंतरिक जांच की प्रक्रिया में अनियमितताएं थीं। उन्होंने न्यायालय में तर्क दिया कि उन्हें उचित सुनवाई और निष्पक्ष जांच का अधिकार नहीं मिला।
यह न्यायिक निर्णय भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न के मामलों के संभालने की प्रक्रिया पर नया प्रकाश डालता है। यह मामला संस्थानों की अनुशासनिक शक्तियों और आरोपितों के न्यायिक अधिकारों के बीच संतुलन को दर्शाता है।