📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vice President's Secretariat
राजनीति
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने झंडा लहराने को अपराध मानने पर सवाल उठाए, CJP नेताओं की हिरासत के बीच
✍️ The Economic Times
🗓 15 अक्टू. 2026, 04:47 AM
👁 18
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने झंडा लहराने को अपराध मानने पर सवाल उठाते हुए CJP नेताओं की हालिया हिरासत पर टिप्पणी की।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय ध्वज को अपराध मानने की संभावनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रकार की अभिव्यक्ति को आपराधिक रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत के बाद की गई थी।
कोर्ट ने CJP से जुड़े कई नेताओं को जमानत के बिना हिरासत में रखा है, जिससे कानून प्रवर्तन और राजनीतिक अभिव्यक्ति के बीच संतुलन पर चर्चा छिड़ गई है। आरोपों के विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, पर यह कदम विपक्षी दलों और नागरिक समाज के समूहों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
केजरीवाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ध्वज राष्ट्र की एकता का प्रतीक है और इसे नागरिकों द्वारा लहराने पर आपराधिक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि किसी भी कानूनी कदम में संवैधानिक स्वतंत्रताओं का सम्मान हो और राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध न लगाया जाए।
इकोनॉमिक टाइम्स ने इस बयान को रिपोर्ट किया, यह बताते हुए कि केजरीवाल की टिप्पणी इस मामले के राजनीतिक विमर्श में नई परत जोड़ती है। इस समय न्यायपालिका या CJP नेतृत्व की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा भारत में असहमति, राष्ट्रवाद और कानून के शासन के व्यापक बहस में एक महत्वपूर्ण बिंदु बन सकता है, विशेषकर जब मामला अदालतों में आगे बढ़ेगा।
कोर्ट ने CJP से जुड़े कई नेताओं को जमानत के बिना हिरासत में रखा है, जिससे कानून प्रवर्तन और राजनीतिक अभिव्यक्ति के बीच संतुलन पर चर्चा छिड़ गई है। आरोपों के विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, पर यह कदम विपक्षी दलों और नागरिक समाज के समूहों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
केजरीवाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ध्वज राष्ट्र की एकता का प्रतीक है और इसे नागरिकों द्वारा लहराने पर आपराधिक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि किसी भी कानूनी कदम में संवैधानिक स्वतंत्रताओं का सम्मान हो और राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध न लगाया जाए।
इकोनॉमिक टाइम्स ने इस बयान को रिपोर्ट किया, यह बताते हुए कि केजरीवाल की टिप्पणी इस मामले के राजनीतिक विमर्श में नई परत जोड़ती है। इस समय न्यायपालिका या CJP नेतृत्व की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा भारत में असहमति, राष्ट्रवाद और कानून के शासन के व्यापक बहस में एक महत्वपूर्ण बिंदु बन सकता है, विशेषकर जब मामला अदालतों में आगे बढ़ेगा।