📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
सरकारी योजना
दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों के लिए पीएम‑उदय योजना को तेज़ करने हेतु 65 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मंजूर
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 07 अक्टू. 2026, 07:17 PM
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केंद्रीय सरकार ने दिल्ली के अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को संपत्ति अधिकार देने वाली पीएम‑उदय योजना को तेज़ करने के लिए 65 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट मंजूर किया।
नई दिल्ली – आवास और शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्रालय ने दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में पीएम‑उदय योजना को तेज़ करने के लिए 65 करोड़ रुपये के विज़न प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। 2023 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य उन बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों को कानूनी संपत्ति अधिकार प्रदान करना है, जहाँ आधिकारिक स्वीकृति नहीं है।
स्वीकृत योजना के तहत फंड का उपयोग मौजूदा कॉलोनियों का सर्वेक्षण करने, लंबित भूमि विवादों को सुलझाने और पात्र परिवारों को टाइटल डीड जारी करने में किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि तेज़ गति से कार्यान्वयन से 2027 तक 1.5 मिलियन परिवारों को स्वामित्व प्रदान करने का लक्ष्य पूरा होगा।
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस ब्रीफ़िंग में वरिष्ठ मंत्रालय अधिकारी ने बताया कि यह परियोजना शहरी बुनियादी ढांचे को सुधारने और निम्न‑आय वर्गों के वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के व्यापक उद्देश्य के साथ मेल खाती है। संपत्ति अधिकार मिलने से लाभार्थियों को ऋण प्राप्त करने में आसानी होगी, क्योंकि संपत्ति को अक्सर ऋण के लिए जमानत के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि कई कॉलोनी निवासियों ने इस कदम का स्वागत किया है, कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो। मंत्रालय ने परियोजना के आगे बढ़ने पर नियमित निगरानी और सार्वजनिक रिपोर्टिंग का वादा किया है।
स्वीकृत योजना के तहत फंड का उपयोग मौजूदा कॉलोनियों का सर्वेक्षण करने, लंबित भूमि विवादों को सुलझाने और पात्र परिवारों को टाइटल डीड जारी करने में किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि तेज़ गति से कार्यान्वयन से 2027 तक 1.5 मिलियन परिवारों को स्वामित्व प्रदान करने का लक्ष्य पूरा होगा।
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस ब्रीफ़िंग में वरिष्ठ मंत्रालय अधिकारी ने बताया कि यह परियोजना शहरी बुनियादी ढांचे को सुधारने और निम्न‑आय वर्गों के वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के व्यापक उद्देश्य के साथ मेल खाती है। संपत्ति अधिकार मिलने से लाभार्थियों को ऋण प्राप्त करने में आसानी होगी, क्योंकि संपत्ति को अक्सर ऋण के लिए जमानत के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि कई कॉलोनी निवासियों ने इस कदम का स्वागत किया है, कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो। मंत्रालय ने परियोजना के आगे बढ़ने पर नियमित निगरानी और सार्वजनिक रिपोर्टिंग का वादा किया है।