📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / The Rashtrapati Bhavan
राजनीति
दलित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अंतिम भाषण में लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए सहिष्णुता की अपील की
✍️ ThePrint
🗓 08 नव. 2026, 04:36 PM
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भारत के पहले दलित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने अंतिम भाषण में लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए सहिष्णुता को आवश्यक बताया।
नई दिल्ली – अपने अंतिम संबोधन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सहिष्णुता ही भारत के लोकतंत्र की विश्वसनीयता का मूल स्तंभ है। राष्ट्रपति भवन से संबोधित करते हुए, देश के पहले दलित राष्ट्रपति और पूर्व वकील ने राष्ट्र की बहुलता पर प्रकाश डाला और सभी समुदायों एवं विचारों का सम्मान करने का आग्रह किया।
कोविंद ने अपने छह साल के कार्यकाल के अंत में समावेशी विकास और सामाजिक सद्भावना पर बल दिया। उन्होंने विभाजनकारी बयानबाजी के खिलाफ चेतावनी दी, यह कहते हुए कि वह लोकतंत्र जो असहमति को सहन करता है और विविधताओं को अपनाता है, वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी वैधता बनाए रख सकता है।
उनके इस भाषण को विभिन्न राजनीतिक वर्गों के नेताओं ने सराहा, जिन्होंने बढ़ते साम्प्रदायिक तनाव के बीच एकता की पुकार को दोहराया। विश्लेषकों का मानना है कि सहिष्णुता पर कोविंद का ज़ोर संविधानिक सिद्धांतों के अनुरूप है और आगामी नीति चर्चाओं को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्रपति पद सौंपने की तैयारी में कोविंद के ये अंतिम शब्द भारत के लोकतांत्रिक प्रयोग की नैतिक जिम्मेदारी की याद दिलाते हैं।
कोविंद ने अपने छह साल के कार्यकाल के अंत में समावेशी विकास और सामाजिक सद्भावना पर बल दिया। उन्होंने विभाजनकारी बयानबाजी के खिलाफ चेतावनी दी, यह कहते हुए कि वह लोकतंत्र जो असहमति को सहन करता है और विविधताओं को अपनाता है, वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी वैधता बनाए रख सकता है।
उनके इस भाषण को विभिन्न राजनीतिक वर्गों के नेताओं ने सराहा, जिन्होंने बढ़ते साम्प्रदायिक तनाव के बीच एकता की पुकार को दोहराया। विश्लेषकों का मानना है कि सहिष्णुता पर कोविंद का ज़ोर संविधानिक सिद्धांतों के अनुरूप है और आगामी नीति चर्चाओं को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्रपति पद सौंपने की तैयारी में कोविंद के ये अंतिम शब्द भारत के लोकतांत्रिक प्रयोग की नैतिक जिम्मेदारी की याद दिलाते हैं।