📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Anchal lilhare
धर्म
क्रिकेटर कुलदीप यादव और तिलक वर्मा ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में भाग लिया
✍️ Amar Ujala · Ujjain
🗓 12 अक्टू. 2026, 09:01 AM
👁 17
भारत की जीत के बाद क्रिकेटर कुलदीप यादव और तिलक वर्मा ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह की भस्म आरती में भाग लिया, साथ में हॉकी खिलाड़ी विवेक प्रसाद भी मौजूद रहे।
उज्जैन, मध्य प्रदेश – सोमवार सुबह भारत की क्रिकेट टीम के दो खिलाड़ी, तेज गेंदबाज़ कुलदीप यादव और ऑल‑राउंडर तिलक वर्मा, महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में शामिल हुए। टीम की हालिया जीत के बाद वे भक्तों के साथ मिलकर भगवान शिव को अर्पित अर्चना में भाग लिए।
भस्म आरती में पवित्र भस्म को शिवलिंग पर छिड़का जाता है और उपस्थित लोग उसके अभिषेक में भाग लेते हैं। दोनों क्रिकेटर पुजारी के साथ खड़े होकर इस अनुष्ठान को देख रहे थे और भविष्य के मैचों के लिए आशीर्वाद माँगे।
हॉकी के मध्यक्रमी विवेक प्रसाद भी इस अवसर पर मंदिर पहुंचे और पुजारी से वही आशीर्वाद प्राप्त किया। दो अलग‑अलग खेलों के खिलाड़ियों की उपस्थिति ने इस पवित्र स्थल के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।
खेल संघों के प्रतिनिधियों ने इस यात्रा पर कोई टिप्पणी नहीं की, परंतु यह सभा खिलाड़ियों की कृतज्ञता और जीत के बाद आस्था के महत्व को दर्शाती है।
महाकालेश्वर मंदिर, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, बड़े‑बड़े खेल जीत के बाद अक्सर उच्च प्रोफ़ाइल व्यक्तियों को आकर्षित करता है, जिससे यह मध्य भारत का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बना रहता है।
भस्म आरती में पवित्र भस्म को शिवलिंग पर छिड़का जाता है और उपस्थित लोग उसके अभिषेक में भाग लेते हैं। दोनों क्रिकेटर पुजारी के साथ खड़े होकर इस अनुष्ठान को देख रहे थे और भविष्य के मैचों के लिए आशीर्वाद माँगे।
हॉकी के मध्यक्रमी विवेक प्रसाद भी इस अवसर पर मंदिर पहुंचे और पुजारी से वही आशीर्वाद प्राप्त किया। दो अलग‑अलग खेलों के खिलाड़ियों की उपस्थिति ने इस पवित्र स्थल के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।
खेल संघों के प्रतिनिधियों ने इस यात्रा पर कोई टिप्पणी नहीं की, परंतु यह सभा खिलाड़ियों की कृतज्ञता और जीत के बाद आस्था के महत्व को दर्शाती है।
महाकालेश्वर मंदिर, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, बड़े‑बड़े खेल जीत के बाद अक्सर उच्च प्रोफ़ाइल व्यक्तियों को आकर्षित करता है, जिससे यह मध्य भारत का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बना रहता है।