📷 चित्र स्रोत: The Hindu (via NewsData)
राजनीति
सीपीआई(एम) नेता का दावा: आरएसएस ने केरल में श्री कृष्ण जयंती परेड को राजनीतिक साधन बनाया
✍️ The Hindu
🗓 05 सित. 2026, 03:19 AM
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सीपीआई(एम) नेता जयराजन का कहना है कि आरएसएस ने केरल में श्री कृष्ण जयंती उत्सव को परिवारों में राजनीतिक आधार बनाने के लिए शुरू किया है।
सीपीआई(एम) नेता जयराजन ने कहा है कि केरल में मनाए जा रहे श्री कृष्ण जयंती परेड केवल धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं। उनका तर्क है कि इन उत्सवों को राज्य भर के परिवारों में समर्थन आधार बनाने के लिए शुरू किया गया है, जिससे सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आरएसएस के संगठित प्रयासों से जोड़ा गया है।
यह बयान वार्षिक कृष्ण उत्सव के दौरान परेड की बढ़ती दृश्यता के जवाब में दिया गया, जिसमें आरएसएस से जुड़े समूहों की भागीदारी देखी गई। जयराजन ने संकेत दिया कि कार्यक्रमों का समय और पैमाना यह दर्शाता है कि आरएसएस अपने विचारधारात्मक प्रभाव को समुदाय की परम्पराओं में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
आरएसएस की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी दर्ज नहीं हुई, पर यह दावा केरल में धर्म और राजनीति के संगम पर चल रही बहस में नया आयाम जोड़ता है, विशेषकर जब दायें पंख के संगठनों की सार्वजनिक त्योहारों में भागीदारी को लेकर सवाल उठते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आरोप अक्सर चुनावी दौर में उभरते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सांस्कृतिक प्रतीकों को राजनीतिक समर्थन के साधन के रूप में कैसे उपयोग किया जाता है। केरल की विविध मतदाता वर्ग में आरएसएस के प्रभाव को रोकने के लिए सीपीआई(एम) ने हमेशा इस तरह के कदमों का विरोध किया है।
यह मुद्दा दोनों पक्षों के बीच केरल के मतदाताओं पर प्रभाव बनाने की जद्दोजहद के चलते आगे भी चर्चा का विषय बना रहेगा।
यह बयान वार्षिक कृष्ण उत्सव के दौरान परेड की बढ़ती दृश्यता के जवाब में दिया गया, जिसमें आरएसएस से जुड़े समूहों की भागीदारी देखी गई। जयराजन ने संकेत दिया कि कार्यक्रमों का समय और पैमाना यह दर्शाता है कि आरएसएस अपने विचारधारात्मक प्रभाव को समुदाय की परम्पराओं में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।
आरएसएस की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी दर्ज नहीं हुई, पर यह दावा केरल में धर्म और राजनीति के संगम पर चल रही बहस में नया आयाम जोड़ता है, विशेषकर जब दायें पंख के संगठनों की सार्वजनिक त्योहारों में भागीदारी को लेकर सवाल उठते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे आरोप अक्सर चुनावी दौर में उभरते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सांस्कृतिक प्रतीकों को राजनीतिक समर्थन के साधन के रूप में कैसे उपयोग किया जाता है। केरल की विविध मतदाता वर्ग में आरएसएस के प्रभाव को रोकने के लिए सीपीआई(एम) ने हमेशा इस तरह के कदमों का विरोध किया है।
यह मुद्दा दोनों पक्षों के बीच केरल के मतदाताओं पर प्रभाव बनाने की जद्दोजहद के चलते आगे भी चर्चा का विषय बना रहेगा।