📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Flashthomsom
देश
अधिवासी जमीन के लेन‑देन में चोठनागपुर टेनेन्सी एक्ट के उल्लंघन पर बिक्री विलेख अमान्य
✍️ Live Law
🗓 01 सित. 2026, 06:40 PM
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उच्च न्यायालय ने कहा कि चोठनागपुर टेनेन्सी एक्ट का उल्लंघन करने वाले अधिवासी जमीन के लेन‑देन को पंजीकृत बिक्री विलेख वैध नहीं माना जा सकता।
एक भारतीय न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि चोठनागपुर टेनेन्सी एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले अधिवासी जमीन के लेन‑देन को पंजीकृत बिक्री विलेख वैध नहीं माना जा सकता। यह निर्णय दर्शाता है कि स्वदेशी समुदायों की भूमि सुरक्षा के लिये बनाई गई क़ानूनी व्यवस्था साधारण रजिस्ट्री प्रक्रिया से ऊपर है।
यह फैसला तब आया है जब यह चिंता बढ़ रही थी कि दस्तावेज़ी बिक्री के माध्यम से इस एक्ट को बायपास कर अधिवासी जमीन का हनन किया जा रहा है। एक्ट की सुरक्षा को कमजोर न करने के लिये न्यायालय ने ऐसे विलेखों को अमान्य कर दिया है, जिससे tribal गांवों की सामाजिक‑आर्थिक संरचना बनी रहे।
क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश संपत्ति कानून पर tenancy legislation की प्राथमिकता को दोहराता है और भविष्य में किसी भी अधिवासी जमीन के लेन‑देन को एक्ट की शर्तों को पूरा करना अनिवार्य करेगा। यह निर्णय झारखंड और अन्य समान tribal संरक्षण वाले राज्यों में चल रहे मामलों पर असर डालने की संभावना रखता है।
यह फैसला तब आया है जब यह चिंता बढ़ रही थी कि दस्तावेज़ी बिक्री के माध्यम से इस एक्ट को बायपास कर अधिवासी जमीन का हनन किया जा रहा है। एक्ट की सुरक्षा को कमजोर न करने के लिये न्यायालय ने ऐसे विलेखों को अमान्य कर दिया है, जिससे tribal गांवों की सामाजिक‑आर्थिक संरचना बनी रहे।
क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश संपत्ति कानून पर tenancy legislation की प्राथमिकता को दोहराता है और भविष्य में किसी भी अधिवासी जमीन के लेन‑देन को एक्ट की शर्तों को पूरा करना अनिवार्य करेगा। यह निर्णय झारखंड और अन्य समान tribal संरक्षण वाले राज्यों में चल रहे मामलों पर असर डालने की संभावना रखता है।