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15 अक्टू. 2026•
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कोर्ट ने कहा माँ की अनुपस्थिति सेक्शन 151 के तहत अभिरक्षा संशोधन का आधार नहीं
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Indrajit Das
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कोर्ट ने कहा माँ की अनुपस्थिति सेक्शन 151 के तहत अभिरक्षा संशोधन का आधार नहीं

✍️ Live Law 🗓 15 अक्टू. 2026, 04:17 AM 👁 14
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एक हालिया फैसले में स्पष्ट किया गया कि अभिरक्षा मामले में माँ की अनुपस्थिति सेक्शन 151 के तहत आदेश में बदलाव का कारण नहीं बन सकती।

बेंच ने एक ऐसी याचिका पर विचार किया जिसमें माँ के सुनवाई में अनुपस्थित रहने के बाद मौजूदा अभिरक्षा आदेश में बदलाव की माँग की गई थी। याचिकाकर्ता ने सेक्शन 151 के आधार पर तर्क दिया कि अनुपस्थिति परिस्थितियों में परिवर्तन दर्शाती है, जिससे संशोधन उचित है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि केवल अनुपस्थिति से बच्चे के कल्याण या माता की क्षमता में वास्तविक परिवर्तन नहीं सिद्ध होता।

न्यायालय ने बताया कि सेक्शन 151 का उद्देश्य वास्तविक तथ्यात्मक बदलावों के लिए है, न कि प्रक्रियात्मक चूकों के लिए। यह कहा गया कि आदेश में बदलाव तभी संभव है जब बच्चे की सुरक्षा या जीवन स्थितियों में स्पष्ट परिवर्तन हो, न कि केवल अनुपस्थिति के कारण। इस कारण याचिका को खारिज कर दिया गया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि प्रक्रिया की त्रुटियों को अभिरक्षा के मूल मानदंडों से ऊपर नहीं उठाया जा सकता।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से न्यायपालिका का यह संदेश स्पष्ट होता है कि अभिरक्षा मामलों में बदलाव के लिए ठोस सबूत आवश्यक हैं, न कि केवल प्रक्रियात्मक कारण। यह निर्णय भविष्य में समान विवादों में मार्गदर्शक सिद्ध होगा, जिससे संशोधन केवल वास्तविक परिवर्तन के आधार पर ही मांगा जा सकेगा।

फैसले ने यह भी रेखांकित किया कि यदि अभिरक्षा आदेश में बदलाव की इच्छा हो तो पक्षकारों को स्थानांतरण, स्वास्थ्य समस्याओं या सुरक्षा संबंधी जोखिम जैसे ठोस कारण प्रस्तुत करने चाहिए।

समग्र रूप से, कोर्ट ने प्रक्रिया की निष्पक्षता को बच्चे के सर्वोत्तम हित के साथ संतुलित करने का प्रयास किया है, जिससे परिवारिक कानून में न्यायसंगत निर्णय सुनिश्चित हो सके।
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