📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhashish Panigrahi
धर्म
कोर्ट ने बिना आवेदन के हिंदू कानून के तहत अंतरिम रखरखाव आदेश जारी किया
✍️ Live Law
🗓 26 अक्टू. 2026, 05:46 PM
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कोर्ट ने कहा कि बिना किसी औपचारिक आवेदन के भी वह हिंदू कानून के तहत अंतरिम रखरखाव का आदेश दे सकता है।
एक हालिया निर्णय में, भारतीय न्यायालय ने यह कहा कि वह हिंदू कानून के तहत अंतरिम रखरखाव का आदेश बिना किसी आवेदन के भी दे सकता है। यह फैसला पारिवारिक मामलों में वित्तीय सहायता की आवश्यकता होने पर न्यायालय की सक्रिय हस्तक्षेप शक्ति को रेखांकित करता है।
अंतरिम रखरखाव, जो आमतौर पर चल रहे मुकदमों के दौरान पति‑पत्नी या बच्चों को अस्थायी आर्थिक सहायता प्रदान करता है, व्यक्तिगत कानून की धारा के अंतर्गत आता है। अपने स्वयं के पहल पर (सुओ मोतु) कार्य करके न्यायालय बिना पक्षों की याचिका के भी राहत प्रदान कर सकता है, जिससे प्रक्रिया में देरी के कारण असहाय लोगों को समर्थन न मिलने की स्थिति से बचा जा सके।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय पारिवारिक विवादों में न्यायालय‑प्रेरित राहत की सीमा को विस्तृत कर सकता है, विशेषकर उन मामलों में जहाँ पीड़ित न्यायालय से संपर्क करने में असमर्थ या हिचकिचाते हैं। यह कदम हिंदू व्यक्तिगत कानून की सुरक्षा भावना को सुदृढ़ करने के साथ‑साथ प्रक्रिया की न्यायसंगतता को भी संतुलित करने का उद्देश्य रखता है।
अंतरिम रखरखाव, जो आमतौर पर चल रहे मुकदमों के दौरान पति‑पत्नी या बच्चों को अस्थायी आर्थिक सहायता प्रदान करता है, व्यक्तिगत कानून की धारा के अंतर्गत आता है। अपने स्वयं के पहल पर (सुओ मोतु) कार्य करके न्यायालय बिना पक्षों की याचिका के भी राहत प्रदान कर सकता है, जिससे प्रक्रिया में देरी के कारण असहाय लोगों को समर्थन न मिलने की स्थिति से बचा जा सके।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय पारिवारिक विवादों में न्यायालय‑प्रेरित राहत की सीमा को विस्तृत कर सकता है, विशेषकर उन मामलों में जहाँ पीड़ित न्यायालय से संपर्क करने में असमर्थ या हिचकिचाते हैं। यह कदम हिंदू व्यक्तिगत कानून की सुरक्षा भावना को सुदृढ़ करने के साथ‑साथ प्रक्रिया की न्यायसंगतता को भी संतुलित करने का उद्देश्य रखता है।