📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vsrana2958
राजनीति
राजस्थान निकाय चुनाव में कांग्रेस की बढ़त, बोर्ड नहीं बने, जांच कमेटी गठित
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 03 अक्टू. 2026, 08:45 AM
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राजस्थान निकाय चुनाव में कांग्रेस को बढ़त मिलने के बावजूद कई जगह बोर्ड नहीं बन पाए, अब सीपी जोशी की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी सात दिन में रिपोर्ट देगी।
राजस्थान में हाल ही में हुए निकाय चुनावों में कांग्रेस ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिद्वंदियों से आगे बढ़ते हुए जीत दर्ज की, जैसा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रारंभिक परिणामों में बताया। ग्रामीण और शहरी मतदाताओं को आकर्षित करने वाले विकास वादों ने पार्टी को मजबूत समर्थन दिलाया।
परिणामस्वरूप, कांग्रेस को कई जिलों में निकाय बोर्डों की स्थापना में बाधाओं का सामना करना पड़ा। उम्मीदवार चयन और प्रशासनिक अड़चनों के कारण कई नगरपालिका और पंचायत बोर्डों में अभी तक निर्वाचित नेतृत्व नहीं बन पाया, जिससे विपक्षी दल और नागरिक संगठनों ने आलोचना की है।
इन चुनौतियों को दूर करने के लिए कांग्रेस राज्य इकाई ने सीपी जोशी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की है। इस कमेटी को बोर्ड गठन में आई गड़बड़ियों की जाँच कर सुधारात्मक कदम सुझाने का कार्य सौंपा गया है, और जोशी ने सात दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आश्वासन दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि बोर्डों की देर से गठन पार्टी की विकास योजनाओं के कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकता है और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष को पार्टी की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाने का अवसर प्रदान कर सकता है।
परिणामस्वरूप, कांग्रेस को कई जिलों में निकाय बोर्डों की स्थापना में बाधाओं का सामना करना पड़ा। उम्मीदवार चयन और प्रशासनिक अड़चनों के कारण कई नगरपालिका और पंचायत बोर्डों में अभी तक निर्वाचित नेतृत्व नहीं बन पाया, जिससे विपक्षी दल और नागरिक संगठनों ने आलोचना की है।
इन चुनौतियों को दूर करने के लिए कांग्रेस राज्य इकाई ने सीपी जोशी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की है। इस कमेटी को बोर्ड गठन में आई गड़बड़ियों की जाँच कर सुधारात्मक कदम सुझाने का कार्य सौंपा गया है, और जोशी ने सात दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आश्वासन दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि बोर्डों की देर से गठन पार्टी की विकास योजनाओं के कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकता है और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष को पार्टी की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाने का अवसर प्रदान कर सकता है।