📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Women and Child Development
राजनीति
सीजेआई ने चेतावनी दी, दिल्ली के जंतर मंतर को हटाने से पूरा देश बन सकता है जंतर मंतर
✍️ The Times of India
🗓 13 अक्टू. 2026, 02:02 AM
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सीजेआई ने कहा, दिल्ली के जंतर मंतर को प्रोटेस्ट स्थल से हटाने से पूरे देश में असंतोष बढ़ेगा, और इसे जंतर मंतर जैसा बना दिया जाएगा।
दिल्ली प्रशासन ने जंतर मंतर को सार्वजनिक प्रदर्शन के अनुमोदित स्थानों की सूची से हटा दिया है। कई कानूनी चुनौतियों के बाद लिया गया यह कदम न्यायपालिका में तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न कर चुका है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) प्रशांत कुमार मिश्रा ने मीडिया को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि इस कदम से देश भर में विरोध आंदोलनों की लहर उठ सकती है। उन्होंने कहा, "यदि राजधानी का ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल हटाया जाता है, तो पूरा देश जंतर मंतर बन सकता है," जिससे इस स्थल के प्रतीकात्मक महत्व पर प्रकाश पड़ा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जंतर मंतर लंबे समय से नागरिक असंतोष का केंद्र रहा है, और इसकी सूची हटाने से प्रदर्शनकारियों को कम नियमन वाले अन्य स्थानों की ओर रुख करना पड़ सकता है। सीजेआई की टिप्पणी लोकतांत्रिक सभा के अधिकार को सुरक्षित रखने की चिंता को उजागर करती है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय सुरक्षा कारणों और क्षेत्र में ट्रैफ़िक जाम को नियंत्रित करने की आवश्यकता के आधार पर लिया गया था। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वैध प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँगी।
यह घटना भारत में सार्वजनिक व्यवस्था और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन पर चल रहे बहस में एक नया आयाम जोड़ती है, जो हाल के न्यायालय के फैसलों और संसद की चर्चाओं में प्रमुख रूप से उभरी है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) प्रशांत कुमार मिश्रा ने मीडिया को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि इस कदम से देश भर में विरोध आंदोलनों की लहर उठ सकती है। उन्होंने कहा, "यदि राजधानी का ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल हटाया जाता है, तो पूरा देश जंतर मंतर बन सकता है," जिससे इस स्थल के प्रतीकात्मक महत्व पर प्रकाश पड़ा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जंतर मंतर लंबे समय से नागरिक असंतोष का केंद्र रहा है, और इसकी सूची हटाने से प्रदर्शनकारियों को कम नियमन वाले अन्य स्थानों की ओर रुख करना पड़ सकता है। सीजेआई की टिप्पणी लोकतांत्रिक सभा के अधिकार को सुरक्षित रखने की चिंता को उजागर करती है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय सुरक्षा कारणों और क्षेत्र में ट्रैफ़िक जाम को नियंत्रित करने की आवश्यकता के आधार पर लिया गया था। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वैध प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँगी।
यह घटना भारत में सार्वजनिक व्यवस्था और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन पर चल रहे बहस में एक नया आयाम जोड़ती है, जो हाल के न्यायालय के फैसलों और संसद की चर्चाओं में प्रमुख रूप से उभरी है।