📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ms Sarah Welch
स्थानीय
नागरिक समूह ने गुजरात तटीय प्रबंधन प्राधिकरण पर तट सुरक्षा में लापरवाही का आरोप
✍️ The Times of India
🗓 09 सित. 2026, 05:04 AM
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एक स्थानीय नागरिक समूह ने कहा है कि गुजरात तटीय प्रबंधन प्राधिकरण (GCZMA) तट की सुरक्षा में विफल है, जिससे अपर्याप्त प्रवर्तन और बढ़ती क्षरण की समस्या बढ़ रही है।
गुजरात के एक स्थानीय पर्यावरणीय समूह ने गुजरात तटीय प्रबंधन प्राधिकरण (GCZMA) पर राज्य के संवेदनशील तट को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है। समूह ने कुच्छ और सौराष्ट्र जैसे प्रमुख तटीय जिलों में अनियंत्रित क्षरण की घटनाओं को उजागर किया, यह कहते हुए कि प्राधिकरण की निगरानी और निवारण उपाय अपर्याप्त हैं।
समूह के अनुसार, हालिया सर्वेक्षणों में दिखाया गया है कि अवैध रेत खनन और अनियंत्रित निर्माण कार्यों के कारण तट रेखा में तेज़ी से कमी आई है। इस मुद्दे को उजागर करने के लिए उन्होंने राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें कड़े नियमों का प्रवर्तन और तटीय नियमों की सख्त निगरानी की मांग की गई है।
राज्य के अधिकारियों ने अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन GCZMA के आगामी त्रैमासिक बैठक में इस मामले की समीक्षा की जाएगी। पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि निरंतर लापरवाही से तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, मछली पकड़ने वाले समुदाय और समुद्र पर निर्भर लोगों की आजीविका को खतरा हो सकता है।
समूह ने पारदर्शिता बढ़ाने, तटीय परियोजनाओं के नियमित सार्वजनिक ऑडिट और निर्णय‑निर्माण प्रक्रिया में स्थानीय हितधारकों की भागीदारी की मांग की है, ताकि गुजरात के तट की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
समूह के अनुसार, हालिया सर्वेक्षणों में दिखाया गया है कि अवैध रेत खनन और अनियंत्रित निर्माण कार्यों के कारण तट रेखा में तेज़ी से कमी आई है। इस मुद्दे को उजागर करने के लिए उन्होंने राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें कड़े नियमों का प्रवर्तन और तटीय नियमों की सख्त निगरानी की मांग की गई है।
राज्य के अधिकारियों ने अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन GCZMA के आगामी त्रैमासिक बैठक में इस मामले की समीक्षा की जाएगी। पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि निरंतर लापरवाही से तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, मछली पकड़ने वाले समुदाय और समुद्र पर निर्भर लोगों की आजीविका को खतरा हो सकता है।
समूह ने पारदर्शिता बढ़ाने, तटीय परियोजनाओं के नियमित सार्वजनिक ऑडिट और निर्णय‑निर्माण प्रक्रिया में स्थानीय हितधारकों की भागीदारी की मांग की है, ताकि गुजरात के तट की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।