📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / This illustration was made by Peter Potrowl.
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झारखंड के मेधा घोटाले में CID ने 12 पर 97 पन्नों की चार्जशीट दायर, पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष शामिल
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 27 अक्टू. 2026, 06:02 PM
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सीआईडी ने रांची की विशेष अदालत में 12 आरोपियों, जिसमें पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष खियांत भी शामिल हैं, के खिलाफ 97 पन्नों की चार्जशीट दायर की।
रांची, झारखंड – केंद्रीय जांच विभाग (सीआईडी) ने रांची की विशेष अदालत में 97 पन्नों की चार्जशीट दायर की, जिसमें मेधा भर्ती घोटाले में संलिप्त बारह व्यक्तियों का नाम है। यह मामला, जो 2023 की शुरुआत में उजागर हुआ था, राज्य की जेपीएससी परीक्षाओं में भर्ती प्रक्रिया के दुरुपयोग से जुड़ा था।
चार्जशीट में पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष खियांत सहित बारह आरोपियों को शामिल किया गया है, जिन पर उम्मीदवारों की सूची में हेरफेर और अनुबंधों के अनियमित आवंटन का आरोप है। दस्तावेज़ में वित्तीय लेन-देन, झूठे कागजात और अधिकार के दुरुपयोग के प्रमाण सम्मिलित हैं, जो कई महीनों की भर्ती अवधि को कवर करते हैं।
रांची की विशेष अदालत, जो इस प्रकार के मामलों को तेज़ी से निपटाने के लिए स्थापित की गई थी, अब सीआईडी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य की जांच करेगी। अभियोजकों ने बताया कि इस विस्तृत दस्तावेज़ में गवाहियों, फोरेंसिक रिपोर्ट और ऑडिट ट्रेल शामिल हैं, जिसका उद्देश्य दोषी का स्पष्ट प्रमाण स्थापित करना है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में बड़े पैमाने पर भर्ती धोखाधड़ी को सख्ती से सजा देने के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जबकि आरोपियों को आगे की सुनवाई और जमानत के आवेदन का इंतजार है।
चार्जशीट में पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष खियांत सहित बारह आरोपियों को शामिल किया गया है, जिन पर उम्मीदवारों की सूची में हेरफेर और अनुबंधों के अनियमित आवंटन का आरोप है। दस्तावेज़ में वित्तीय लेन-देन, झूठे कागजात और अधिकार के दुरुपयोग के प्रमाण सम्मिलित हैं, जो कई महीनों की भर्ती अवधि को कवर करते हैं।
रांची की विशेष अदालत, जो इस प्रकार के मामलों को तेज़ी से निपटाने के लिए स्थापित की गई थी, अब सीआईडी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य की जांच करेगी। अभियोजकों ने बताया कि इस विस्तृत दस्तावेज़ में गवाहियों, फोरेंसिक रिपोर्ट और ऑडिट ट्रेल शामिल हैं, जिसका उद्देश्य दोषी का स्पष्ट प्रमाण स्थापित करना है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में बड़े पैमाने पर भर्ती धोखाधड़ी को सख्ती से सजा देने के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है, जबकि आरोपियों को आगे की सुनवाई और जमानत के आवेदन का इंतजार है।