📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sentinel-2 via Copernicus Browser
विदेश
चीन ने छोचन‑पुरेप संगपो बैरियर लेक के फटने की चेतावनी, भारत के नीचे के क्षेत्रों में जल‑प्रभाव
✍️ Aaj Tak
🗓 28 अग. 2026, 08:28 AM
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चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने छोचन‑पुरेप संगपो के संगम पर स्थित बैरियर लेक के 72 घंटे में टूटने का उच्च जोखिम बताया, जिससे गंडकी नदी के माध्यम से भारत के नीचे के क्षेत्रों में जल‑प्रभाव की चिंता बढ़ी है।
चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने बताया है कि छोचन और पुरेपु संगपो नदियों के संगम पर बना बैरियर लेक अगले 72 घंटे में टूटने का उच्च जोखिम रखता है। हालिया सर्वेक्षणों में जलस्तर में वृद्धि और प्राकृतिक बांध पर तनाव के संकेत मिले हैं, जिससे यह चेतावनी जारी की गई है।
यह लेक हिमालय के तिब्बती भाग में स्थित है और यहाँ से निकलने वाली धारा नेपाल में प्रवेश कर गंडकी नदी बनती है। गंडकी आगे भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक पानी पहुंचाती है, इसलिए किसी भी अचानक टूटने से दोनों देशों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
भारत और नेपाल के संबंधित विभागों को यह चेतावनी दी गई है और वे निचले क्षेत्रों में नदी के जलस्तर को कड़ी नजर से देख रहे हैं। स्थानीय स्तर पर अलर्ट सिस्टम सक्रिय किए जा रहे हैं ताकि बाढ़‑प्रवण इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर सूचना मिल सके और आपातकालीन निकासी एवं राहत कार्य की तैयारी की जा सके।
हिमालय में बैरियर लेक के अचानक फटने की घटनाएँ पहले भी देखी गई हैं, अक्सर तेज़ बर्फ पिघलने या भूकंपीय गतिविधियों से उत्पन्न होती हैं। अभी तक कोई व्यापक निकासी आदेश नहीं दिया गया है, पर अधिकारियों ने नागरिकों से कहा है कि वे स्थानीय सूचना स्रोतों पर नजर रखें।
यह घटना भारत‑नेपाल‑चीन के बीच जल संसाधनों की पारस्परिक निर्भरता को उजागर करती है और भविष्य में ऐसी स्थितियों के लिए सामूहिक निगरानी एवं सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
यह लेक हिमालय के तिब्बती भाग में स्थित है और यहाँ से निकलने वाली धारा नेपाल में प्रवेश कर गंडकी नदी बनती है। गंडकी आगे भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक पानी पहुंचाती है, इसलिए किसी भी अचानक टूटने से दोनों देशों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
भारत और नेपाल के संबंधित विभागों को यह चेतावनी दी गई है और वे निचले क्षेत्रों में नदी के जलस्तर को कड़ी नजर से देख रहे हैं। स्थानीय स्तर पर अलर्ट सिस्टम सक्रिय किए जा रहे हैं ताकि बाढ़‑प्रवण इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर सूचना मिल सके और आपातकालीन निकासी एवं राहत कार्य की तैयारी की जा सके।
हिमालय में बैरियर लेक के अचानक फटने की घटनाएँ पहले भी देखी गई हैं, अक्सर तेज़ बर्फ पिघलने या भूकंपीय गतिविधियों से उत्पन्न होती हैं। अभी तक कोई व्यापक निकासी आदेश नहीं दिया गया है, पर अधिकारियों ने नागरिकों से कहा है कि वे स्थानीय सूचना स्रोतों पर नजर रखें।
यह घटना भारत‑नेपाल‑चीन के बीच जल संसाधनों की पारस्परिक निर्भरता को उजागर करती है और भविष्य में ऐसी स्थितियों के लिए सामूहिक निगरानी एवं सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करती है।