📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ms Sarah Welch
स्थानीय
छत्तीसगढ़ के गांव में लंगूर समस्या से निपटने के लिए काँटेदार छतें और रखवाला
✍️ The Indian Express
🗓 13 अक्टू. 2026, 07:38 AM
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छत्तीसगढ़ के एक गांव में लंगूरों के लगातार झुंडों को रोकने के लिए काँटेदार छतें और रखवाला लगाया गया है, जबकि कुछ लोगों ने लंगूरों की बड़ी संख्या में हत्या का आरोप लगाया है।
छत्तीसगढ़ के एक दूरस्थ गांव में लंगूरों के लगातार घरों और खेतों में घुसपैठ करने से ग्रामीणों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को रोकने के लिए कई घरों ने सामान्य छतों की जगह काँटेदार शीटें लगाई हैं, जिससे लंगूरों के लिए छत पर बैठना खतरनाक हो जाता है।
भौतिक रोकथाम के साथ ही गांव ने एक पूर्णकालिक रखवाला भी नियुक्त किया है, जो सुबह और शाम के समय जब लंगूर अधिक सक्रिय होते हैं, पहरा देता है। रखवाले की मौजूदगी से लंगूरों को भगाने और फसलों व संपत्ति को नुकसान से बचाने में मदद मिलती है।
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति बिगड़ कर लंगूरों की बड़ी संख्या में हत्या तक पहुंच गई, जिसमें कई जानवरों को गोली मारकर या जाल में फँसाकर मार दिया गया। इस बात की पुष्टि स्थानीय अधिकारियों ने नहीं की है, और वन विभाग ने गैर‑हिंसक उपाय अपनाने तथा वन संरक्षण अधिनियम के तहत मार्गदर्शन लेने की अपील की है।
यह घटना मध्य भारत में मानव‑वन्यजीव सह-अस्तित्व की व्यापक चुनौती को उजागर करती है, जहाँ कृषि भूमि का विस्तार और वन क्षेत्रों का टुकड़ाव लोगों और प्राइमेट्स के बीच निकटता बढ़ा रहा है।
जिला वन विभाग ने एक फील्ड मूल्यांकन करने और बफ़र फसल लगाना, सौर‑संचालित निरोधक उपकरण स्थापित करना जैसे उपायों की तलाश करने का वादा किया है, ताकि हिंसक तरीकों पर निर्भरता कम की जा सके।
भौतिक रोकथाम के साथ ही गांव ने एक पूर्णकालिक रखवाला भी नियुक्त किया है, जो सुबह और शाम के समय जब लंगूर अधिक सक्रिय होते हैं, पहरा देता है। रखवाले की मौजूदगी से लंगूरों को भगाने और फसलों व संपत्ति को नुकसान से बचाने में मदद मिलती है।
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति बिगड़ कर लंगूरों की बड़ी संख्या में हत्या तक पहुंच गई, जिसमें कई जानवरों को गोली मारकर या जाल में फँसाकर मार दिया गया। इस बात की पुष्टि स्थानीय अधिकारियों ने नहीं की है, और वन विभाग ने गैर‑हिंसक उपाय अपनाने तथा वन संरक्षण अधिनियम के तहत मार्गदर्शन लेने की अपील की है।
यह घटना मध्य भारत में मानव‑वन्यजीव सह-अस्तित्व की व्यापक चुनौती को उजागर करती है, जहाँ कृषि भूमि का विस्तार और वन क्षेत्रों का टुकड़ाव लोगों और प्राइमेट्स के बीच निकटता बढ़ा रहा है।
जिला वन विभाग ने एक फील्ड मूल्यांकन करने और बफ़र फसल लगाना, सौर‑संचालित निरोधक उपकरण स्थापित करना जैसे उपायों की तलाश करने का वादा किया है, ताकि हिंसक तरीकों पर निर्भरता कम की जा सके।