📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ashish.prajapati90
धर्म
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा, धार्मिक संस्थाएँ कोर्ट नहीं बन सकती
✍️ The Hindu
🗓 09 सित. 2026, 11:33 AM
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा कि कोई भी धार्मिक संस्था न्यायिक कार्य नहीं कर सकती, जिससे धर्म और कानून के बीच स्पष्ट विभाजन स्थापित हुआ।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि धार्मिक संस्थाएँ न्यायिक कार्य नहीं कर सकतीं। कोर्ट ने बताया कि मुकदमेबाजी का अधिकार केवल स्थापित न्यायिक प्रणाली को ही है और किसी भी धार्मिक संस्था द्वारा कोर्ट की तरह विवाद सुलझाना विधिक अधिकार के बाहर है।
यह निर्णय एक याचिका के बाद आया, जिसमें एक स्थानीय धार्मिक समूह द्वारा अनौपचारिक विवाद समाधान सत्रों को अदालत के रूप में चलाने पर सवाल उठाया गया था। कोर्ट ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि संविधान एक धर्मनिरपेक्ष कानूनी ढांचा सुनिश्चित करता है, जहाँ केवल विधि द्वारा स्थापित कोर्ट ही न्याय प्रदान कर सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह राय भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को दोहराती है और राज्य में धार्मिक अधिकार के दुरुपयोग को रोकती है। यह निर्णय भविष्य में समान मामलों में निचले स्तर के न्यायालयों और प्रशासनिक निकायों के लिए मार्गदर्शक होगा।
यह निर्णय एक याचिका के बाद आया, जिसमें एक स्थानीय धार्मिक समूह द्वारा अनौपचारिक विवाद समाधान सत्रों को अदालत के रूप में चलाने पर सवाल उठाया गया था। कोर्ट ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि संविधान एक धर्मनिरपेक्ष कानूनी ढांचा सुनिश्चित करता है, जहाँ केवल विधि द्वारा स्थापित कोर्ट ही न्याय प्रदान कर सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह राय भारतीय संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को दोहराती है और राज्य में धार्मिक अधिकार के दुरुपयोग को रोकती है। यह निर्णय भविष्य में समान मामलों में निचले स्तर के न्यायालयों और प्रशासनिक निकायों के लिए मार्गदर्शक होगा।