📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / swap
अपराध
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गर्भपात अपराध के लिए सहमति प्रमाण अनिवार्य किया
✍️ The Indian Express
🗓 02 अक्टू. 2026, 11:02 AM
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि गर्भपात अपराध साबित करने के लिए महिला की सहमति का प्रमाण आवश्यक है, जिससे स्पष्ट साक्ष्य के बिना अभियोजन संभव नहीं।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने हाल ही में दिए गए निर्णय में कहा कि गर्भपात अपराध साबित करने के लिए महिला की सहमति का दस्तावेजी प्रमाण आवश्यक है। न्यायालय ने जोर दिया कि इस प्रमाण के बिना अभियोजन अपराध स्थापित नहीं कर सकता। यह निर्णय गर्भधारण समाप्ति से संबंधित मामलों में कानूनी मानकों को स्पष्ट करता है और गलत दोषसिद्धियों को रोकने का लक्ष्य रखता है।
कानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि यह फैसला आपराधिक उत्तरदायित्व में सहमति को प्रमुख तत्व के रूप में स्थापित करता है। यह निर्णय राज्य के भविष्य के मामलों में संदर्भित किया जाएगा, जिससे आरोपों को ठोस साक्ष्य के साथ प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल पड़ेगा।
यह निर्णय भारत में प्रजनन अधिकारों और गर्भपात अपराध की कानूनी परिभाषा पर चल रही बहस के बीच आया है। यद्यपि यह मौजूदा कानूनों को नहीं बदलता, यह अभियोजकों के लिए साक्ष्य मानक को ऊँचा करता है।
उच्च न्यायालय का यह निर्णय आगामी मुकदमों में सहमति के मुद्दे पर विवादित मामलों में उद्धृत होने की संभावना है।
कानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि यह फैसला आपराधिक उत्तरदायित्व में सहमति को प्रमुख तत्व के रूप में स्थापित करता है। यह निर्णय राज्य के भविष्य के मामलों में संदर्भित किया जाएगा, जिससे आरोपों को ठोस साक्ष्य के साथ प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल पड़ेगा।
यह निर्णय भारत में प्रजनन अधिकारों और गर्भपात अपराध की कानूनी परिभाषा पर चल रही बहस के बीच आया है। यद्यपि यह मौजूदा कानूनों को नहीं बदलता, यह अभियोजकों के लिए साक्ष्य मानक को ऊँचा करता है।
उच्च न्यायालय का यह निर्णय आगामी मुकदमों में सहमति के मुद्दे पर विवादित मामलों में उद्धृत होने की संभावना है।