📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ashish.prajapati90
धर्म
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने धार्मिक संस्थाओं को न्यायालय बनने से रोका
✍️ thehindu.com
🗓 09 सित. 2026, 10:49 PM
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा कि कोई भी धार्मिक संस्था न्यायालय की भूमिका नहीं निभा सकती, जिससे न्यायिक अधिकारों को धार्मिक संस्थाओं से अलग किया गया।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि धार्मिक संस्थाओं को न्यायालय की भूमिका नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि संविधान के तहत केवल विधायी रूप से स्थापित न्यायालयों को न्यायिक शक्ति प्राप्त है, और किसी भी धार्मिक संस्था द्वारा न्याय प्रदान करना अधिकार के बाहर है।
यह निर्णय एक याचिका के जवाब में आया, जिसमें किसी धार्मिक संगठन द्वारा न्यायालय जैसा विवाद समाधान करने की प्रथा को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थाएँ आंतरिक रूप से मध्यस्थता कर सकती हैं, पर वे बाध्यकारी आदेश या दंड नहीं लगा सकतीं।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला शक्ति के पृथक्करण सिद्धांत को सुदृढ़ करता है और समान रूप से लागू होने वाले कानून को कमजोर करने वाले समानांतर न्यायिक तंत्र को रोकता है। यह निर्णय निचले न्यायालयों और धार्मिक समूहों को भविष्य में नागरिक विवादों के निपटारे में मार्गदर्शन देगा।
यह निर्णय एक याचिका के जवाब में आया, जिसमें किसी धार्मिक संगठन द्वारा न्यायालय जैसा विवाद समाधान करने की प्रथा को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक संस्थाएँ आंतरिक रूप से मध्यस्थता कर सकती हैं, पर वे बाध्यकारी आदेश या दंड नहीं लगा सकतीं।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला शक्ति के पृथक्करण सिद्धांत को सुदृढ़ करता है और समान रूप से लागू होने वाले कानून को कमजोर करने वाले समानांतर न्यायिक तंत्र को रोकता है। यह निर्णय निचले न्यायालयों और धार्मिक समूहों को भविष्य में नागरिक विवादों के निपटारे में मार्गदर्शन देगा।