📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / President's Secretariat
बिज़नेस
छत्तीसगढ़ सरकार ने हेलिकॉप्टर दावे पर ओरिएंटल इंश्योरेंस को 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया
✍️ Rediff
🗓 08 अक्टू. 2026, 07:46 PM
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छत्तीसगढ़ सरकार ने हेलिकॉप्टर बीमा दावे को लेकर ओरिएंटल इंश्योरेंस को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है, जिससे राज्य के अनुबंधों में इस कंपनी की भागीदारी रुक गई।
छत्तीसगढ़ सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि ओरिएंटल इंश्योरेंस को अगले तीन साल तक राज्य के किसी भी बीमा प्रोजेक्ट में भाग लेने से प्रतिबंधित किया जाएगा। यह कदम राज्य में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना के बाद दायर किए गए बीमा दावे के विवाद के कारण उठाया गया है, जिसे अधिकारियों ने कंपनी की नीति शर्तों के अनुसार निपटाए जाने में कमी बताई।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि ओरिएंटल इंश्योरेंस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों में असंगतियां थीं और कंपनी ने निर्धारित समय सीमा से अधिक देर से निपटान किया। इस कारण विभाग ने राज्य की खरीद नियमावली के तहत कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार प्रयोग किया।
ब्लैकलिस्ट का अर्थ है कि तीन साल की अवधि के दौरान ओरिएंटल इंश्योरेंस को छत्तीसगढ़ में किसी भी सरकारी टेंडर में बोली लगाने की अनुमति नहीं होगी। यह कदम सार्वजनिक निधियों की सुरक्षा और बीमा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
हालांकि बीमा कंपनी ने अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई निजी बीमा कंपनियों के सरकारी दावों के प्रबंधन में कड़ी निगरानी का precedent स्थापित कर सकती है।
बैन की समीक्षा तीन साल बाद की जाएगी, और सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में भागीदारी केवल तब ही संभव होगी जब कंपनी निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करेगी।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि ओरिएंटल इंश्योरेंस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों में असंगतियां थीं और कंपनी ने निर्धारित समय सीमा से अधिक देर से निपटान किया। इस कारण विभाग ने राज्य की खरीद नियमावली के तहत कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार प्रयोग किया।
ब्लैकलिस्ट का अर्थ है कि तीन साल की अवधि के दौरान ओरिएंटल इंश्योरेंस को छत्तीसगढ़ में किसी भी सरकारी टेंडर में बोली लगाने की अनुमति नहीं होगी। यह कदम सार्वजनिक निधियों की सुरक्षा और बीमा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
हालांकि बीमा कंपनी ने अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई निजी बीमा कंपनियों के सरकारी दावों के प्रबंधन में कड़ी निगरानी का precedent स्थापित कर सकती है।
बैन की समीक्षा तीन साल बाद की जाएगी, और सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में भागीदारी केवल तब ही संभव होगी जब कंपनी निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन करेगी।