📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Arjunaraoc
बिज़नेस
केंद्र ने अंध्र प्रदेश के ₹27,370 करोड़ के पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी
✍️ Business Standard
🗓 26 अक्टू. 2026, 02:03 AM
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केंद्र ने अंध्र प्रदेश के ₹27,370 करोड़ के पावर ट्रांसमिशन योजना को मंजूरी दी, जिससे राज्य की ग्रिड को सुदृढ़ करने और निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंध्र प्रदेश में ₹27,370 करोड़ के पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जिससे राज्य की विद्युत बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यह मंजूरी राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत विस्तृत प्रस्ताव के बाद मिली, जिसमें बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई थी।
इस योजना के तहत नई हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों की स्थापना और मौजूदा सबस्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिससे ट्रांसमिशन नुकसान कम होगा और विश्वसनीयता में सुधार होगा। ग्रिड को सुदृढ़ करके सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण को भी आसान बनाया जाएगा, जो इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे हैं।
वित्त पोषण में केंद्र की सहायता और राज्य के संसाधनों का मिश्रण रहेगा, और कार्यान्वयन अगले वित्तीय वर्ष के भीतर शुरू होने की संभावना है। अधिकारियों का मानना है कि उन्नत नेटवर्क निजी निवेश को आकर्षित करेगा, रोजगार सृजन करेगा और अंध्र प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देगा।
संबंधित पक्षों ने कहा है कि यह परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के लक्ष्यों के साथ मेल खाती है, जिससे राज्य दक्षिण भारत में स्वच्छ ऊर्जा वितरण का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
इस योजना के तहत नई हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों की स्थापना और मौजूदा सबस्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिससे ट्रांसमिशन नुकसान कम होगा और विश्वसनीयता में सुधार होगा। ग्रिड को सुदृढ़ करके सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के एकीकरण को भी आसान बनाया जाएगा, जो इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे हैं।
वित्त पोषण में केंद्र की सहायता और राज्य के संसाधनों का मिश्रण रहेगा, और कार्यान्वयन अगले वित्तीय वर्ष के भीतर शुरू होने की संभावना है। अधिकारियों का मानना है कि उन्नत नेटवर्क निजी निवेश को आकर्षित करेगा, रोजगार सृजन करेगा और अंध्र प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देगा।
संबंधित पक्षों ने कहा है कि यह परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के लक्ष्यों के साथ मेल खाती है, जिससे राज्य दक्षिण भारत में स्वच्छ ऊर्जा वितरण का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।