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चंद्रगुप्त कोयला परियोजना में बाहरी गाड़ियों का दबदबा, स्थानीय युवाओं को समोसा बेचने पर मजबूर
हजारीबाग के केरेडारी क्षेत्र में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि चंद्रगुप्त कोयला परियोजना में कोयला ढुलाई के लिए बाहरी राज्यों की गाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय युवा बेरोजगारी की शिकार हैं।
केरेडारी/हजारीबाग। चंद्रगुप्त कोयला परियोजना क्षेत्र में कोयला ढुलाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना से जुड़ी ढुलाई की गतिविधियों में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के नंबर वाली बाहरी गाड़ियों का दबदबा बना हुआ है। इस तथ्य के बावजूद क्षेत्र के स्थानीय युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं और अपनी आजीविका चलाने के लिए छोटे-मोटे कारोबार, यहां तक कि समोसा बेचने तक को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कोयला परियोजना संचालित होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि माइंस की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर खुट्टा-खंभा गाड़कर रास्ता बाधित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में और भी नाराजगी है। लोगों का सवाल है कि जब क्षेत्र में खनन और ढुवाई का काम हो रहा है, तो स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन से मांग की है कि कोयला ढुलाई के कार्य में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, बाहरी नंबर की गाड़ियों के संचालन और सड़क बाधित किए जाने के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि इन आरोपों पर प्रशासन एवं संबंधित प्रबंधन क्या कदम उठाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कोयला परियोजना संचालित होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि माइंस की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर खुट्टा-खंभा गाड़कर रास्ता बाधित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में और भी नाराजगी है। लोगों का सवाल है कि जब क्षेत्र में खनन और ढुवाई का काम हो रहा है, तो स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन से मांग की है कि कोयला ढुलाई के कार्य में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, बाहरी नंबर की गाड़ियों के संचालन और सड़क बाधित किए जाने के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि इन आरोपों पर प्रशासन एवं संबंधित प्रबंधन क्या कदम उठाते हैं।